तर्क से नहीं भावना से संविधान स्वीकार्य होना जरुरीः झा
धनगढी, २० सितम्बर । राष्ट्रीय जनता पार्टी के नेता अनिल झा ने कहा है कि वर्तमान संविधान सभी जाति और समुदाय के लिए स्वीकार नहीं है, उन लोगों की अधिकार संविधान में सुनिश्चित नहीं की गई है । उनका मानना है कि कोई भी संविधान तर्क के आधार में नहीं भावनात्मक रुप में स्वीकार्य होना जरुरी है । उसी के अनुसार संविधान संशोधन के लिए भी उन्होंने सरकार से आग्रह किया ।
बिहीबार धनगढी में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में बोलते हुए नेता झा ने कहा– ‘वर्तमान संविधान में मधेशी, थारु, आदिवासी, जनजाति, दलितों की अधिकार नहीं है, संविधान में नागरिकता, भूगोल, भाषा संबंधी प्रावधान में भी त्रृटियां है । इसीलिए सभी को स्वीकार्य बनाने के लिए संविधान में संशोधन आवश्यक है । उनका कहना है कि संविधान राज्य और जनता के बीच एक सम्झौता है, जो सभी के हित की परिकल्पना करती है ।

