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भिट्ठामोड में महाकाली के मूर्ति का अनावरण और पूजन प्रारंभ

 

जलेश्वर । कल्ह मिति 2075 कार्तिक 29 गत्ते महोत्तरी जिला जलेश्वर नगर पालिका के दक्षिणी भाग भीठामोड़ जो भारतीय बॉर्डर से सटा हुआ है, वहां बड़ी भव्यता के साथ महाकाली के मूर्ति का अनावरण और पूजन प्रारंभ हुआ।


काली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती दुर्गा का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी।   काली की व्युत्पत्ति काल  अथवा  समय  से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ जगदम्बा का यह रूप है नाश करने वाला है। पर यह रूप सिर्फ उनके लिए हैं जो दानवीय प्रकृति के हैं, जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अत: माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है। इनको महाकाली भी कहते हैं। दुर्गा सप्तसती के जाप में प्रथम खण्ड के रूप में महाकाली का ही पूजन होता है। फिर महालक्ष्मी और महा सरश्वती का। इस प्रकार माँ काली हिन्दू तथा मानव मात्र के लिए प्रथम पूज्य हैं।

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हर वर्ष की तरह इसबार भी माँ कालिका के शोभा यात्रा बड़ी श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। एक हजार बालिकाओं के द्वारा कलश भरण यात्रा कार्यक्रम आयोजन किया गया। इसके प्रमुख अतिथि के रूप में रा ज पा नेपाल के संयोजक तथा वरिष्ठ नेता श्री महंत ठाकुर जी उपस्थित थे। तो वहीं पर राज्य मंत्री, सभासद, कांग्रेस पार्टी के नेता, कार्यकर्ता, लोग उपस्थित थे। नेपाल के भिठामोड़ जो मलिबारा गाँव के नाम से जाना जाता है, वहाँ के घर घर से लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। महिला,बच्चे,बूढ़े सभी लोग बड़ी हार्दिकता, सौम्यता और मधुरता के साथ इस कार्यक्रम में सामेल थें। कार्यक्रम की शोभा और उमंग बढाने के लिए भारत से 5 घुड़सवार मंगाए गए थे, जो पूरे कलश यात्रा की शोभा को, उत्साह और उमंग को बढ़ा रखा था। बच्चे नौजवान सब घुड़दौर को देखकर बड़े ही आनंदित और गौरवान्वित हो रहे थे। कार्यक्रम के केन्द्र्विंदु इस घोडदौड ने कितनों को अपनी जवानी यद् दिला दिया।
देवी दुर्गा के विभिन्न अवतारों में से एक हैं काली माता। काली मां सिद्धि और पराशक्तियों की आराधना करने वाले साधकों की इष्ट देवी मानी गई हैं। लेकिन केवल तांत्रिक साधना के लिए ही नहीं अपितु आम जन के लिए भी मां काली की आराधना समान रूप से फलदायी मानी गई हैं।

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मां काली का स्वरूप अवश्य उग्र हैं परंतु यह भी सत्य है कि कलयुग में अत्यधिक जागृत दैवीय शक्तियों में महाकाली का परम स्थान हैं। एक बार प्रसन्न होने पर मां अपने भक्तों की मनोकामना शीघ्र-अतिशीघ्र पूरी करती हैं।
माता को लाल तिलक और लाल पुष्प आदि अर्पित करें। मां काली की पूजा में पुष्प लाल रंग का और कपडे काले रंग के होने चाहिए।
मां काली के किसी भी मंत्र का 108 बार जप करें। काली गायत्री मंत्र या मां के बीज मंत्रों का जप करना बेहद फलदायी होता है।
अपनी इच्छा पूरी होने तक इस प्रयोग को जारी रखें। यदि आप विशेष उपासना करना चाहते हैं तो सवा लाख, ढाई लाख, पांच लाख मंत्र का जप अपनी सुविधा अनुसार कर सकते हैं।
यहाँ कुछ विशेष मन्त्र लिख रहा हु जो मंत्र शस्त्रों में वर्णित हैं और इन्हें काफी असरदार माना जाता है। परंतु इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और कुछ मंत्रों को विशेष संख्या में ही जपना चाहिए।
((ह्रीं” और “क्रीं”)) दुर्गासप्तशती में वर्णित
((“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:’))
महामंत्र का वर्णन है जो मां के नौ स्वरूपों को समर्पित है।
सिद्धी प्राप्ति के लिए इस महामंत्र का विशेष महत्व है। 108 बार जप करने से सभी दुखों का निवारण करके घन-धान्य की वृद्धि होती है।
कुछ ऐसे मन्त्र भी है जिसकी जाप करने से प्रेमल और सौभाग्य प्रदान करने बाले जीवन साथी की प्राप्ति होती है।
इसबार की महा काली पूजन हम सब के लिए सुफलादायी हो,और हम में मंत्रों को जाप करने का शक्ति और भक्ति माँ कालिका से प्राप्त हो इसी शुभेच्छा के साथ, जय माँ काली!!

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