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नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान का संस्थागत संबंध भारत की साहित्य अकादमी के साथ रहा है : गंगा प्रसाद उप्रेती

Ganga Prasad Upreti 3
गंगा प्रसाद उप्रेती कुलपति, नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान

हिमालिनी, अंक जनवरी 2019 |नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान नेपाल की भाषा, साहित्य, संस्कृति को समर्पित संस्था है जहाँ इनका संवद्र्धन, प्रचार और प्रसार किया जाता है । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति आदरणीय गंगाप्रसाद उप्रेती ने उप कुलपति और कुलपति के रूप में प्रतिष्ठान को अपना अमूल्य योगदान दिया है और कुलपति के पद पर आप दूसरी बार आसीन हैं । साहित्य और हिन्दी भाषा के महत्तव पर आधारित आपके विचार के साथ राजकुमार श्रेष्ठ के द्वारा की गई बातचीत का संपादित अंश प्रस्तुत है–

 

प्रश्नः नमस्कार ! आप नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान के एक अति सम्माननीय और गरिमामयी पद पर आसीन हैं । यहाँ तक की यात्रा कैसी रही ? हमारे पाठकों को संक्षिप्त रूप में कुछ बतायें ।
उत्तरः धन्यवाद । नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान के कुलपति की हैसियत से यह मेरा दूसरा कार्यकाल है । पहली बार कुलपति का कार्यभार संभालने से पूर्व उप–कुलपति (२००८–२०१३) के रूप में भी कार्यरत रहा । उप–कुलपति के कार्यकाल की भी गणना करें तो नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान में यह मेरा तीसरा कार्यकाल है । यहाँ तक की यात्रा के सवाल में कहूँ तो यह यात्रा मैंने सुखद महसूस की है । इस समय हमारा पूरा प्रयत्न प्रज्ञा–प्रतिष्ठान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रूप में गरिमामयी प्राज्ञिक संस्था के रूप में स्थापित करने की ओर लक्षित है और ऐसा लगता है कि हम इसी लक्ष्य पर ही उन्मुख हैं ।
प्रश्नः नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान क्या–क्या गतिविधियाँ करती हैं ? यहाँ तक की विकास यात्रा के बारे में कुछ बतायें ।
उत्तरः नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान २२ जून, १९५७ में नेपाली भाषा, कला, साहित्य, संस्कृति और ज्ञान–विज्ञान के क्षेत्रा में अध्ययन, अनुसंधान के माध्यम से प्रवतर्न करने के कार्यभार के साथ स्थापित संस्था है । यह प्रतिष्ठान अपने स्थापना काल से ही अपने लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करती आ रही है । बीच में इसी प्रतिष्ठान के अंतर्गत विज्ञान विधा के प्रवतर्न के लिए अलग से नेपाल विज्ञान प्रज्ञा–प्रतिष्ठान की स्थापना की गयी और उसी विधा के लिए दिए गए अख्तियार को पूरा करने के लिए प्रतिष्ठान भी संतोषप्रद काम करती आ रही है । नेपाल के पिछले राजनीतिक परिवर्तन ने देश को संघीय गणतंत्रात्मक संरचना में रूपांतरण करने के बाद देश की ललित कला और संगीत नाट्य विधा के प्रवतर्न के लिए अलग–अलग प्रज्ञा–प्रतिष्ठान कार्यरत हैं । नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान को देश की भाषा, संस्कृति, साहित्य, सामाजिक शास्त्र और दर्शन विधा के प्रवतर्न के लिए अधिकार प्राप्त हैं । प्राप्त अधिकार को पूरा करने के लिए अध्ययन, अनुसंधान, गोष्ठी, सेमिनार तथा ग्रन्थ लेखन और प्रकाशन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर देश की बहुलता को संबोधित करने हेतु हम कार्यरत हैं । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी प्रकृति से मेल रखने वाले अन्य देश के समकक्षी प्रज्ञा–प्रतिष्ठान के साथ सहकार्य करने का काम भी प्रभावकारी रूप से सम्पन्न किया जा रहा है ।
प्रश्नः नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान क्या हिन्दी भाषा साहित्य के संदर्भ में भी कुछ गतिविधियाँ करती है ?
उत्तरः हिन्दी भाषा को नेपाल के प्राज्ञिक क्षेत्र और संचार माध्यमों में गहरा प्रभाव जमाने में सफल अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हम लेते हैं । हम जानते हैं कि हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के द्वारा विकसित भारतीय साहित्य नेपाली नागरिकों के लिए ज्ञानवद्धर्न का महत्वपूर्ण साधन है । इस अर्थ में हिन्दी भाषा और साहित्य की कृतियों का प्रकाशन करना, नेपाली और हिन्दी भाषा में प्रकाशित कृतियों का अनुवाद के माध्यम से आदान–प्रदान करना हमारे नियमित कार्यक्रम होते हैं । हमारे प्रज्ञा–प्रतिष्ठान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण विभाग के रूप में अनुवाद विभाग है । इस विभाग के संयोजन में भारतीय साहित्य की कई कृतियों को नेपाली में और नेपाली साहित्य की कृतियों को हिन्दी भाषा में अनूदित कर प्रकाशित किया गया है और प्रकाशित होने का क्रम अभी जारी है । इसी विभाग द्वारा ‘रूपांतरण’ नाम से अनुवाद कर्म में समर्पित पत्रिका का नियमित रूप से प्रकाशन किया जाता है । इस पत्रिका में मुख्य रूप से हिन्दी से नेपाली और नेपाली से हिन्दी में अनूदित कृतियों का प्रकाशन किया जाता है ।
प्रश्नः नेपाली और हिन्दी भाषा साहित्य के परस्पर विकास एवं अंतर संबंध् के लिए क्या–क्या सार्थक प्रयास किये जा सकते हैं ? आप क्या–क्या संभावनाएं देखते हैं ?
उत्तरः नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान का संस्थागत संबंध भारत की साहित्य अकादमी के साथ रहा है । दोनों संस्थाओं के सहकार्य में नेपाली और हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में लिखत साहित्य का आदान–प्रदान किया जा सकता है । इसके अलावा सह प्रकृति की अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर भी काम किया जा सकता है . इस तरह के काम शरू भी किये जा चुके हैं ।
प्रश्नः नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान की आगामी योजनाएं क्या–क्या हैं ? इस पर कुछ प्रकाश डालिए ।
उत्तरः प्रज्ञा–प्रतिष्ठान को स्तरयुक्त प्राज्ञिक संस्था के रूप में विकसित करने के लिए इसके कुछ पूर्वाधारों का निर्माण तथा निर्मित पूर्वाधारों की स्तरोन्नति करना आवश्यक है । विशेष कर भारतीय सहयोग से निर्मित पुस्तकालय भवन में प्रज्ञा–प्रतिष्ठान का पुस्तकालय संचालित होता आ रहा है । इसकी स्तरोन्नति के लिए जगह अपर्याप्त है । भारत सरकार से इस भवन में अन्य दो मंजिल बढ़ाकर पर्याप्त जगह बनाने के लिए बात हो चुकी है । पुस्तकालय की पाठ्यसामग्रियों को डिजिटलाइज्ड कर ई–लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जायेगा ।

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