वहम की बीमारी
इस देश को एक अजीब सी बीमारी लग गई है । जिसे दूर करने के लिए नेता लोग आए दिन विदेश में ईलाज कराने जा रहे हैं । नेताओं को लगता हैं कि उनकी यह बीमारी देश में ठीक नहीं होगी । इसी लिए विदेश जा कर बीमारी को जड से मिटाना चाहते हैं । और जब भी कोई नेता या उनका परिवार विदेश में ईलाज करवाने जाते हैं देश की अवाम उद्धेलित हो जाती है कि उनके द्धारा देश के विकास के लिए दिया गया राजस्व का बडा हिस्सा नेताओं के सुख, सुविधा और बीमारी के इलाज के लिए खर्च हो रहा है । पर अवाम यह भूल जाती है कि हमनें ही अरबों रुपए खर्च कर के निर्वाचन के माध्यम द्धारा इन नेताओं को अपने भाग्य विधाता के रुप में चुना है तो अब शिकायत कैसी ? चुनने की बारी जब हमारी थी तब हम नें ककंर को चुन लिया । अब चूना लगाने की बारी नेता की है तो वह हमें खूब चूना लगा रहे हैं । इस देश में सब को वहम की बीमारी है । वह वहम यह है कि एक वही सिर्फ सच्चा देशभक्त, राष्ट्रप्रेमी और ईमानदार है । और बांकी सब भ्रष्ट और बेईमान हैं । नेताओं को भी यह भ्रम है कि देश को उन्होने ही अपने सिर पर उठा रखा है नहीं तो देश कब रसातल में चला गया होता । उसी तरह नेताओं को दूसरा भ्रम की बीमारी यह भी है कि इस देश के अस्पताल और चिकित्सक उनकी बीमारी का ईलाज करने में सक्षम नहीं है । इसी लिए विदेश ऐसे दौड कर चले जाते हैं जैसे लोटा ले कर गाँव के शौचालय जा रहे हों । इनका पासपोर्ट हमेशा तैयार जो रहता है । इस देश के तीन करोड जनसंख्या में से करीब करीब सभी मानसिक रोग से ग्रस्त हैं । और यह मानसिक बीमारी शरीर पर चढ कर धावा बोल रहा है । इन को लगता है कि हर कोई हाथ धो कर इन के पीछे पडे हैं और सब दुश्मन है । सब इन को मार डालना चाहते हैं । जैसे कि माओवादी नेता कमरेड को यह वहम हो गया है काेई उन्हे मारना चाहते है । जैसे कि फोन कर के उन्हे धमकी दी हो कि वह कमरेड को मार डालना चाहते हैं । इंसानीं जगंल में बैठे हैं और विप्लव नाम का चीता उन के जैसे बकरी को मारने के लिए जगंल से आ धमका हो जैसे उसी तरह प्रचडं चिल्ला रहे हैं । पर कोई उनकी चिल्लाहट पर ध्यान नहीं दे रहा । इसी लिए काेई, उनके प्रत्येक गतिविधि और उनके संगठन को सरकारी फरमान पर निषेध करवा दिया । निषेध करवा कर भी जब मन नहीं माना और वहम का बादल चारों तरफ मडंराता रहा तो अपने वहम का ईलाज करवाने के लिए अपनी पत्नी श्री के ईलाज का बहाना कर अमेरिका फुर्र से उड गए । जिस अमेरिका नें कभी उन के आवागमन पर निषेध या रोक लगवाया था उसी के यहां हरण लेने गए बेचारे । हाल ही में भेनेजुएला के प्रति अमेरिकी नीति कि तीखी आलोचना कर के चर्चा में आए कमरेड उसी अमेरिका की गोद में छुपने गए हैं किसी के डर से । अब डर को कोई हटाए भी तो कैसे ? १७ हजार निर्दोष अवाम के हत्या का भूत जो गाहे, बगाहे डराता रहता है उस का ईलाज तो इस संसार में कहीं भी सभंव नहीं हैं । चाहे अमेरिका ही क्यों न पहुंच जाए ? अपने किए की करनी का भूत अमेरिका भी पहुंच जाता है । फिर हेग तो है ही प्रेत बन कर हरेक दिन सपनें में आ कर डराने वाला । बेचारे किस किस से बचें और कहां तक बचें ? हर जगह अपनी पाप कि हांडी फुट्ने का डर सताता रहता है । जब कर्म ही ऐसा किया है तो भूतप्रेत तो पीछा करेगें ही । उन १७ हजार से ज्यादा निर्दोष नागरिक जो १० वर्ष के माओवादी जनयुद्ध के दौरान मार डाले गए थे । उनकी हड्डी या मास भले ही जल या गल गई हो पर उनकी आत्मा तो छटपटा रही है न्याय और शातिं के लिए । जब उन को द्धन्द के दौरान मारने पर आप या आपकी पार्टी का तन या मन नहीं कांपा । हर जायज या नाजायज काम सब किया । अब खुद के जान की ईतना डर कि कोई खुद को मार न डाले ? जब दूसरों को मारते समय वर्ग सघंर्ष या मुक्ति के नाम पर खुब अट्टहास किया था । अब कोई और वैसे ही आप को मार कर अट्टहास करना चाहता हेगा ? तब इसमें डरने या छुपने की क्या बात है ? अपनी करनी की वजह से ही आप के बच्चे आप से पहले चले गए । अब आप कि जाने कि बारी आ रही है तो इस से डरना क्या ? जितना डरोगे मौत का वहम उतना ही डराएगी । और नेताओं के विदेश में ईलाज करवाने पर इतना हल्ला या विरोध क्यों ? इस देश के सीमावर्ती शहर में रहने वाले लोग अपनी हर हारी, बीमारी मे कुछ साल पहले तक या शायद अभी भी पडोसी देश भारत के अस्पतालों में ईलाज करवाने जाते रहे हैं । भारत भी तो बिना पासपोर्ट का विदेश ही तो है । जब आप विदेश (भारत) ईलाज करवाने जा सकते हैं तो नेता या मंत्री क्यों नहीं जा सकते ? । उनके पास तो रेडिमेड पासपोर्ट है तब उसका सदुपयोग कर के क्या गलत कर रहे हैं । रही हमारे द्धारा देश के विकास के लिए दिया गया राजस्व के दुरुपयोग का तो नेता और मंत्री ईस देश के भाग्य विधाता हैं । उन्हे हक हैं हमें लूटनें और बर्बाद करने का । वैसे भी हम आवाद कब थे जो बर्बाद हो गए ? हां हमारी बर्बादी कि मात्रा थोडी और बढ गयी जरुर है । पर यह सब गणतंत्र में चलता है । ईस के लिए ज्यादा सिरियस होना नहीं चाहिए । नहीं तो फिर बिना पासपोर्ट के सीमा के किसी भारतीय शहर में ईलाज के लिए पहुंचा दिए जाओगे ? क्यों कि मियां की दौड मस्जिद तक ही होती है । आप की भी वहीं तक है । ईसी लिए अपने वहम का ईलाज करिए और चलते बनिए । रुके तो आपकी खैर नहीं ।

