Wed. Jan 29th, 2020

ग्लैमरहीन निर्वाचन

व्यग्ंय…………….बिम्मी शर्मा

बचपन में मैं गमीं की भरी दुपहरी में स्कूल से आने के बाद या गमीं की छुट्टी में दिनभर अकेले ही कैरम बोर्ड या लुडो खेलती थी और अकेले ही जीत जाती थी । बांकी तीन साईड से अपने काल्पनिक साथियों को भी खिलवाती थी पर जीतती मैं ही थी । कभी कभी मैं अकेले ही सिर्फ अपनी तरफ से खेलती थी और जीत जाती थी और अकेले ही खुश भी हो जाती थी । अभी वाराणसी का चुनावी माहौल प्रत्यक्ष देख कर मुझे अपना बचपन याद आ रहा है । जहां मैं अकेली ही खेल कर जीत जाती थी । अभी वाराणसी में भी मोदी जी का यही हाल है । वह अकेले ही चुनावी कैरम बोर्ड खेल रहे हैं । क्यों कि उन से प्रतिष्पर्धा में जो उम्मीदवार यहां से उठे हैं वह छांया या न के बराबर है । क्योंकि अब राजनीति या निर्वाचन भी पहले कि तरह सीधी सादी नहीं रही । निर्वाचन में भाग लेने वाले नेता जो सेलिब्रिटी बन गए है उन के कारण अब निर्वाचन भी ग्लैमर्स हो गया है । अब चुनाव में दो नेताओं के बीच भिडंत या टकराव होते देखना मतदाताओं को खूब अच्छा लगता है । उन्हें लगता है कि रामायण के राम, रावण युद्ध या महाभारत के कर्ण और अर्जुन का युद्ध जैसा चुनाव भी रोमाचंक होना चाहिए । जब चुनाव में कोई चार्म, रोमाचंकता या ग्लैमर्स न हो तो मतदाता निराश हो जाते है । उन्हे लगता है ऐसे निर्वाचन में क्या वोट देने जाए जिस में एक उम्मीदवार तो बहुत पाप्युलर और हाथी जैसा है पर उस के विरोध में उठे बांकी उम्मीदवार चीटी जैसे हैं । वाराणसी निर्वाचन का माहौल गर्मा चुका है और मतदाता भी । पर मतदाता निराश है क्यों कि भारतीय प्रधान मंत्री मोदी के इस संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में उन के मुकाबले में उठे दूसरे दल के नेता या प्रत्याशी का कद इतना बौना है कि चुनावी भिडंत में मतदाताओं को मजा नहीं आ रहा है । मतदाताओं को लगता है कि यह बिल्ली और चूहे के बीच हो रही प्रतिष्पर्धा जैसी है । जहां बिल्ली एक ही बार में चूहे को चट कर जाएगी । इस से पहले सन २०१४ में हुए निर्वाचन में मोदी जी के प्रतिद्धन्द्धी आम आदमी पार्टी के नेता अरवींद केजरीवाल थे । तब टक्कर कांटे का था मतदाता भी उत्साहित थे कि कौन जीतेगा या हारेगा । तब निर्वाचन ग्लैमर्स और रौनक वाला था पर इस बार नहीं । इस बार मोदी जी के मुकाबले जो प्रत्याशी दूसरे राजनीतिक दल से उठे है वह इतने बौने है कि जैसे कि आम कें पेड के नीचे बैंगन का झाड हो । काग्रेंस आई से अजय राय और समाजवादी पार्टी से शालिनी यादव वाराणसी के संसदीय निर्वाचन के लिए मोदी जी से प्रतिष्पर्धा में उठे तो है पर वह बैठे बराबर ही है । वाराणसी की मतदाता चाहती है कि काग्रेंस से कम से कम प्रियंका गांधी मोदी जी के टक्कर में उठती तो मजा आता । निर्वाचन में कांटे का भीडंत होता । पर अजय राय का इस से पहले के निर्वाचन में जो हाल हुआ इस बार उस से भी बुरा होगा । कम से कम प्रियकां गांधी भले न जीतती पर काग्रेंस आई के खाते में वोट तो बढ्ता । और निर्वाचन ग्लैमर्स होता और मतदाताओं का आकर्षण बढ्ता । पर यहां के मतदाता निराश हो गए हैं कि इस बार के निर्वाचन में मजा नहीं आएगा । वाराणसी के हर गली और चौक में मतदाता के मुंह में बस यही बात है और वह सुस्त हो गए हैं । अप्रिल २५ में वाराणसी में हुए मोदी जी के रोड शो के बाद उन का कद इतना बढ गया है कि विपक्ष को अपनी जमानत बचानी भी मुश्किल हो जाएगी । वह पिछले निर्वाचन के मुकाबले रेकर्ड मत से जीतगें ऐसा यहां के मतदाता सोचते है । सभी मतदाता मोदी जी के पक्ष में है और उन्ही को फिर से जीतते देखना चाहते है । पर उन्हे मलाल इसी बात का है कि विपक्ष से कोई बढिया उम्मीदवार उठ्ता तो निर्वाचन का आकर्षण बहुत बढ जाता । पर एैसा न होने से मतदाता यह भी सोचते हैं कि मोदी जी को सर्व सम्मति से जीता दिया जाए । बेकार ईतनी गमीं में लाईन लगवा कर वोट देने जाने या दिलवाने से क्या फायदा ? निर्वाचन में कांटे की टक्कर हो तभी मतदाता को मजा आता है । वाराणसी के मतदाता बेचारे इतने निराश हो गए हैं कि उबासी लेने लगे है । हरेक चाय की दुकान में बस यही चर्चा है कि इस बार के चुनाव में मजा नहीं आ रहा । कई मतदाता यहां तक कहते हैं कि मोदी जी ऐसे ही जीत जाएगें आखिर में वोट दे कर क्या फायदा ? खाली मतदाताओं को परेशान कर रही है सरकार । तराजु का पलडा वोट के भारी से उठ नहीं पा रहा है और दूसरा पलडा बेचारा खाली होने से ईतना उपर चला गया है कि सब डावांडोल हो गया है । दोनों पलडा बराबर में साथ, साथ रहे तब ही देखने में मजा आता है । पर यहां तो एक पलडा अदृश्य है । और जो एक पलडा दिखाई दे रहा है वह ईतना भारी है कि उठ नहीं पा रहा है । क्योंकि यह मोदी जी का पलडा है । ईस दुनिया में लोगों के पास कई दुख हैं । पर वाराणसी की जनता को अभी बस यही दुख है कि ईस बार के चुनाव में उनको मजा नहीं आ रहा है । चाय पीते या पान चबाते हुए वह बस यही कहते हैं कि इस चुनाव में कोई आकर्षण या ग्लैमर नहीं बचा । मोदी जी जीतेगें यह तो निश्चित है पर विपक्ष के उम्मीदवार ईतने कमजोर होगें कि उनकी हस्ती इतनी सस्ती रेजगारी जैसी हो जाएगी । मोदी जी वाराणसी के इस चुनाव में दो हजार के सब से बडे नोट और विपक्ष के सारे उम्मीदवार पांच या दश रुपए के छुट्टे या रेजगारी जैसे लग रहे है । इस गर्मी में भी सारी दुनिया की नजर वाराणसी के संसदीय सीट में है पर यहां के मतदाता बेचारे सुस्त और फीके पड गए है गर्मी मार से नहीं निर्वाचन के वार से जिस में कोई पैनापन नहीं बचा है न ही कोई चुनावी ग्लैमर ।

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