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राष्ट्रपति ने समय सीमा तोका । राजनीतिक दलों मे घमासान ??

 

काठमांडू, १९ नवंबर: राष्ट्रपति डॉ. राम बरन यादव ने प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के साथ अपनी बैठक के दौरान नए चुनाव आम सहमति की सरकार और पूर्ण बजट के आपसी मुद्दों को व्यवस्थित करने के लिए गुरुवार नवम्बर 22 तक का समय दिया है ।

एमाओवादी के अध्यक्ष प्रचण्ड, काग्रेस सभापति सुशिल कोइराला, एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल और मधेसी मोर्चा के नेता विजयकुमार गच्छदार को बुलाकर राष्ट्रपति ने इसप्रकार का समयसीमा दिया है । राष्ट्रपति ने पहले ही संकेत दिया था कि अगर दलों व्दारा सहमति करके देश को कोइ  निकास नही दिया गया तो वे चुप नही रह सकते । वैठक मे प्रधानमन्त्री भी मौजुद थे ।

एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल के अनुसार राष्ट्रपति ने बजेट, सहमति की सरकार और निर्वाचन सभी विषयों पर प्याकेज मे ही सहमति करके आने को दलों को कहा है ।
नेपाली काग्रेस के सभापति सुशिल कोइराला ने भी बजेट सहमतिमा बाहेक आउन नसक्ने विषय आफूहरुले राष्ट्रपतिसँगको छलफलमा स्पष्ट पारेको जानकारी दिए ।
बैठकमा एमाओवादीका अध्यक्ष प्रचण्डले भने पूर्ण बजेट आउन नदिने, भरत मोहन अधिकारीले तयार पारेको बजेट पनि आउन नदिने, अघिल्लो वर्षको बजेट नै फेरि ल्याउन नदिने भन्दै आक्रोस पोखेका थिए ।
उनले कर्मचारीले तलबसमेत खान नपाउने अवस्था आउन लागेको भन्दै एकतृतियांश बजेट भए पनि ल्याउन दिन आग्रह गरेका थिए ।
उनले प्रधानमन्त्री डा बाबुराम भट्टराई कै नेतृत्वमा सहमतिको सरकार बनाएर निर्वाचनमा जान आब्हान गरेका थिए । जसलाई काग्रेस र एमालेले ठाडै अस्विकार गरेपछि आक्रोसित प्रचण्डले एमाले र काग्रेसलाई को हो तपाईहरुको प्रधानमन्त्रीको उमेदवार दिनुस भनेर मागेका थिए । जवाफमा काग्रेस र एमालेका शिर्ष नेताले पहिला प्रधानमन्त्रीले राजिनामा दिएपछि तत्कालै आफूहरुको तर्फबाट उमेदवारी दिने बताएका थिए ।
बैठकपछि मधेसी मोर्चाका नेता एवम उपप्रधानमन्त्री विजयकुमार गच्छदारले निर्वाचनमा जाने, दलकै नेतृत्वमा सहमतिको सरकार बन्नु पर्ने लगायतका विषयमा दलहरु सहमतिमै भए पनि नेतृत्वको विषयमा कुरो नमिलेको भन्दै मधेसी मोर्चाको तर्फबाट आफूलाई सहमतिको सरकारको नेतृत्वको जिम्मा दिए सबै विषयमा सहमति कायम गरेर मुलुकलाई निकास दिने ठोकुवा गरे ।

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उनके अनुसार, नेताओं से प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच नए प्रधानमंत्री को चुनने पर कोई असहमति नहीं है, लेकिन वे अभी तक तय करने के लिए जो आम सहमति की सरकार का नेतृत्व करना चाहिए. प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने भी इस बैठक में उपस्थित था.

राष्ट्रपति के साथ आम सहमति के लिए समय सीमा निर्दिष्ट प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए ताजा चुनाव पर एक बैठक की, एक आम सहमति की सरकार के गठन और नए बजट का अनावरण, 3 बजे बाद आज पकड़ का फैसला किया है.

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एक दिन पहले ही, राष्ट्रपति आगाह किया था कि वह एक सक्रिय भूमिका लेने के लिए देश में लंबे समय संकट फैलाना नेताओं को बकाया मुद्दों पर 22 नवंबर तक समझ तक पहुँचने चाहिए असफल होगा.

बैठक से बाहर निकलने, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष सुशील कोइराला और सीपीएन – यूएमएल के अध्यक्ष Jhalanath खनाल दोनों उनके विचारों की है कि सभी मुद्दों पर दलों के बीच एक आम सहमति के आधार पर हल किया जाना चाहिए.

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सत्तारूढ़ UCPN (माओवादी) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल और प्रधानमंत्री भट्टाराई, तथापि, किसी भी टिप्पणी करने के बिना बैठक स्थल छोड़ दिया.

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