Wed. Feb 19th, 2020

जितेंद्र सोनल की बर्खास्तगी पड़ेगी उपेन्द्र यादव पर भारी

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जनकपुर । दो नम्बर प्रदेश अभी विवादों के घेरे में है । कभी मंत्री को बर्खास्त करने की बात आती है तो कभी मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की खबर आती है । मधेश की राजनीति मधेशी नेताओं के स्वार्थ के इर्दगिर्द घूमती नजर आती है ।

इसविच जो खबर आरही है उसके अनुसार मंत्री जितेंद्र सोनल के साथ कुछ राजपा मंत्री को बर्खास्त करने का दवाब मुख्यमंत्री राउत पर रहा है । यह दवाब कहीं और से नहीं है यह उनके ही पार्टी के हाईकमान का दवाब आ रहा है । समाजवादी पार्टी जबसे केंद्र सरकार से हटी है तब से यह दवाब पर रहा है । एक सूत्र के अनुसार इनके हाईकमान को डर इस बात की है कि कहीं लालबाबु राउत या कोई भी दूसरा मधेसी नेता प्रदेश में ज़्यादा शक्तिशाली न हो जाय जिससे कि समाजवादी पार्टी की राजनीति खतरे में पड़ सकती है । इसलिए उपेन्द्र यादव मुख्यमंत्री पर यह दवाब दे रहें है कि जितेंद्र सोनल को बर्खास्त किया जाय । सोनल को बर्खास्त करते ही मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आयेगा और सरकार गिर जाएगी । लोगों का मानना है कि श्री उपेन्द्र यादव दूसरे को सत्ता में शक्तिशाली होना नही देखना चाहतें हैं । यह उनकी ही रणनीति हो सकती है । इधर मुख्यमंत्री विवश हैं ये सत्ता में टिके रहने का हिम्मत  नही जुटा पा रहें हैं न तो इनमें पार्टी के खिलाफ जाने का साहस ही है ।

उधर मंत्री जितेंद्र सोनल को यह चाल पता चल चुका है । उनकी पार्टी के नेता श्री राजेन्द्र महतो खुलकर लग चुके हैं मुख्यमंत्री को हटाने पर । इधर उपेन्द्र यादव की राजेंद्र महतो से बात नही हो पा रही है । श्री यादव अब श्री महंत ठाकुर से बात करने की कोशिश कर रहें है । सोनल यह समझ रहें हैं कि अगर वे मंत्री से हटाये जातें हैं तो वे राजपा के तरफ से मुख्यमंत्री के जबरदस्त दावेदार बन सकते है। जो भी हो सोनल को बर्खास्त करना मधेश की राजनीति के लिए एक अनुचित कदम होगा । अगर इसे स्वार्थ से अलग हटकर उचित समझदारी नही दिखया गया तो आनेवाली स्थिति न तो उपेन्द्र यादव के लिए हितकर होगा और ना ही राजपा को कोई फायदा मिलेगा ।

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