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विश्व को आर्थिक मंदी से निकालने के लिए भारत तैयारः मनमोहन सिंह

 

संयुक्त राष्ट्र। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र से आह्वान किया कि वह वैश्विक आर्थिक मंदी और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीयता के सिद्धांतों को अपनाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिशा में भारत अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “इन चुनौतियों से निपटने के अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। यदि हम एक टकराव वाले रवैये की अपेक्षा एक सहयोगी दृष्टिकोण अपनाते हैं तो हम अवश्य सफल होंगे।”
उन्होंने कहा, “यदि हमारे प्रयासों में सच्चाई है और उन्हें केवल कानून के दायरे से नहीं बल्कि कानून की भावना से जारी रखा जाता है तो हम सफल होंगे।”

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मनमोहन सिंह ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारों के तहत की गई कार्रवाई पर जोर देते हुए कहा, “कार्रवाई करते समय प्रत्येक राष्ट्र की आजादी, सम्प्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एकता का अवश्य सम्मान किया जाना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने महासभा को वैश्विक आर्थिक संकट, आतंकवाद, पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अफ्रीका में सामाजिक एवं राजनीतिक जन विद्रोह की चुनौतियों की तरफ इशारा किया। उन्होंने अनसुलझे फिलीस्तीन संकट का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने महासभा के पुनरुद्धार के साथ संयुक्त राष्ट्र को ‘मजबूत एवं और प्रभावी’ बनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने ‘समकालीन वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से परिलक्षित करने के लिए’ सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें सुधार पर जोर दिया।

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रधानमंत्री ने ‘गति और दक्षता’ के साथ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की शासन प्रणाली में सुधार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “हमें वैश्विक आर्थिक मंदी को संरक्षणवाद के जरिए हमारे चारों तरफ दीवार बनाने अथवा लोगों, सेवाओं और पूंजी की गतिविधियों में अवरोध उत्पन्न करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।”
यह उल्लेख करते हुए कि परमाणु प्रसार आज भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरा बना हुआ है, प्रधानमंत्री ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक कार्य योजना तैयार की थी जिसमें समयबद्ध, वैश्विक, भेदभाव रहित, चरणबद्ध और प्रमाणित तरीके से परमाणु निरस्त्रीकरण हासिल करने की एक स्पष्ट रूपरेखा बताई गई थी।”
संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और उद्देश्यों में विश्वास जताते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि ‘भारत संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।’

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