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भारत चीन सीमा तनाव : पैंगोंग झील के कई पहाड़ी चोटियों पर भारतीय सैन्य तैनाती बढी

 

चीन को जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे की कई पहाड़ी चोटियों पर सामरिक हथियारों और साजो-सामान के साथ सैन्य तैनाती बढ़ी दी है। पैंगोंग झील के उत्तर में फिंगर फोर के इलाके में चीनी सेना की हरकतों को थामने के लिए अग्रिम मोर्चे पर भारतीय सैनिक मुस्तैद हैं। इस बीच, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के ब्रिगेड कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता गुरुवार को भी हुई।

पैंगोंग झील इलाके की दक्षिणी चोटियों पर मजबूत तैनाती के दम पर भारतीय सेना एलएसी के पार चीन के मोल्डो सैन्य बेस समेत उसके कुछ अहम सामरिक पोस्ट पर सीधी निगरानी रख रही है। इसी वजह से बेचैन चीन इन इलाकों से भारतीय सैनिकों को हटाने के लिए बीते 12 दिन से लगातार प्रयास कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार चीनी आक्रामकता को थामने के लिए भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिण की रणनीतिक रूप से अहम सभी चोटियों और पोस्ट पर तैनात सैनिकों की संख्या और बढ़ा दी है। चीनी सेना की चुनौतियों को आंकते हुए हथियारों और सामरिक संसाधनों की क्षमता में भी इजाफा किया गया है। इसी तरह उत्तरी पैंगोंग के फिंगर चार से आठ के इलाके में डटे चीनी सैनिकों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भी इस क्षेत्र के सभी अग्रिम मोर्चो पर भारत ने अपने सैनिकों और हथियारों की संख्या में बढ़ोतरी की है। यहां टैंक, मोर्टार और दूसरे हथियार भी तैनात किए गए हैं।

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सूत्रों ने बताया कि एलएसी पर मौजूदा हालत की गंभीरता को दोनों देश समझ रहे हैं और इसीलिए चुशूल में ब्रिगेड कमांडर और कमांडर स्तर पर गुरुवार को हुई सैन्य वार्ताओं में तनाव के बढ़े पारे को नीचे लाने के कदमों पर बात हुई। वार्ता के नतीजों को लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि भारत ने चीन को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि एलएसी पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने मौजूदा यथास्थिति को एकतरफा बदलने के लिए कोई हरकत की तो भारतीय सैनिक इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।

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भारतीय सैनिकों ने अगस्त के आखिर में इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से सबसे अहम रेजांग-ला और रेकिन-ला के इलाके की महत्वपूर्ण चोटियों पर अपने सैनिकों को तैनात कर चीनी सेना को हतप्रभ कर दिया था। इसके बाद चीन ने 29 और 31 अगस्त को घुसपैठ की कोशिश की। सात सितंबर की शाम 60 चीनी सैनिकों ने बरछी, भाले, रॉड और दूसरे धारदार हथियारों के साथ इन चोटियों से भारतीय सैनिकों को हटाने का प्रयास किया। चीनी सेना ने हवाई फायरिंग तक कर डाली जो बीते 45 साल में ऐसी पहली घटना थी। भारतीय जवानों ने चीन के इरादों को नाकाम कर दिया और उसके बाद से लगातार इन चोटियों पर अपनी सैन्य और रणनीतिक मोर्चेबंदी मजबूत की है।

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भारतीय सेना की बढ़ी निगरानी के चलते ही चीनी सेना की बेचैनी ज्यादा है, क्योंकि सर्दी के मौसम में इन इलाकों में चौबीस घंटे तैनाती दुरूह है। भारतीय सैनिक जिस तैयारी के साथ अब इन चोटियों पर काबिज हैं, उन्हें हटाना चीनी सेना के लिए आसान नहीं है। चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के प्रधान संपादक हू जिन के ट्वीट से भी चीन की बेचैनी झलकती है। उन्होंने ट्वीट किया था, ‘अगर भारतीय सैनिक दक्षिणी पैंगोंग इलाके से नहीं हटते हैं तो चीनी सेना हर मौसम में उनका मुकाबला करने के लिए वहां तैनात रहेगी।’

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