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प्रधानमंत्री विरुद्ध कानुन व्यवसायी सर्वोच्च में

 
सर्वोच्च अदालत, फाईल तस्वीर

काठमांडू, २५ मई । अदालत द्वारा की गई फैसला ना करने के आरोप में कानून व्यवसायियों ने प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली के विरुद्ध सर्वोच्च अदालत पहुँच गए हैं । लेकिन रिट पंजीकृत नहीं हो रही है । कानून व्यवसायियों का कहना है कि अदालती फैसला को अनदेखा कर प्रधानमन्त्री ओली ने संसद् बिघटन किया है ।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा है कि प्रधानमन्त्री ओली नियत से ही पुनस्र्थापित संसद् को असफल बनाना चाहते हैं, इसीलिए उन्होंने विश्वास का मत प्राप्त करने में असफल होते ही प्रतिशोधपूर्ण तरिके से संसद् को पुनः बिघटन किया है, जो अदालत की अवहेलना भी है ।
अधिवक्ता त्रिपाठी ने मांग किया है कि प्रधानमन्त्री ओली को २४ घंटों के भीतर अदालत में उपस्थित कराकर न्याय प्रशासन ऐन २०७३ की दफा १७९७० अनुसार कारवाही होनी चाहिए और उनको एक साल कैद और १० हजार रुपये की जुरमाना होनी चाहिए ।

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