Wed. Jun 17th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

तालिबान द्वारा महिलाओं को सम्मान देने और काम करने देने की बात खोखली, दिखने लगा सच

 

काबुल (रायटर्स)।

अफगानिस्‍तान पर कब्‍जे के बाद तालिबान जिस तरह की बातें कह रहा था अब उसकी हकीकत भी सामने आने लगी है। तालिबान का क्रूर चेहरा एक बार फिर, धीरे ही सही लेकिन दुनिया को देखने को मिल रहा है। दो दिन पहले ही एक वीडियो फुटेज में एक व्‍यक्ति को सरेआम फांसी देते हुए दिखाया गया था। निहत्‍थे अफगानियों पर भी तालिबान ने एक दिन पहले गोली चलाई थी। महिलाओं को लेकर जिस तरह के बयान तालिबान दे रहा था अब उसकी भी कलई खुल गई है।

आपको बता दें कि तालिबान ने कहा था कि महिलाएं पहले की ही तरह अपना काम कर सकती हैं। उसने ये भी कहा था कि वो महिलाओं का अपनी सरकार में स्‍वागत करेगा। लेकिन, अब ये बातें झूठी साबित हो रही हैं। शबनम खान दावरान ने इसका जिक्र रायटर्स से हुई बातचीत के दौरान किया है। शबनम रेडियो-टीवी अफगानिस्‍तान (आरटीए) में काम करती हैं। लेकिन, अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। काबुल पर तालिबान के कब्‍जे के बाद जब वो अपने काम पर वा‍पस गईं तो उन्‍हें वहां मौजूद तालिबानी आतंकियों ने अंदर नहीं जाने दिया।

यह भी पढें   बीआरएबीयू के नए सीसीडीसी बने रक्सौल के लाल प्रो. रजनीश गुप्ता,

शबनम ने बताया कि तालिबान ने उन्‍हें आरटीए के दफ्तर में जाने और काम करने की इजाजत नहीं दी। उन्‍होंने बताया कि वो अपने काम पर वापस जाना चाहती हैं लेकिन अफसोस की बात है कि वो ऐसा करने से मना कर रहे हैं। तालिबान ने यहां पर कब्‍जे के बाद आरटीए प्रमुख पर अपने आदमी को नियुक्‍त कर दिया है। शबनम को वहां मौजूद आतंकियों ने सीधेतौर पर कहा कि अब शासन बदल चुका है और इसमें आप काम नहीं कर सकती हैं। उन्‍होंने ये भी कहा कि उनके काम करने पर अभी कोई फैसला नहीं किया है। इसलिए वो फिलहाल काम नहीं कर सकती हैं। इस तरह की बात सुनने वाली केवल शबनम ही नहीं हैं बल्कि आरटीए में काम करने वाली दूसरी महिलाएं भी हैं।

यह भी पढें   फीफा विश्वकप – ईरान और न्यूजीलैंड का स्कोर २–२ से बराबर

खदीजा ऐसी ही एक और महिला है जिसको तालिबानियों ने काम करने की इजाजत नहीं दी है। आपको बता दें कि तालिबान ने आरटीए में काम करने वाली सभी महिलाओं वापस भेज दिया है। खदीजा ने बताया कि अब आरटीए में कोई भी महिला एंकर या महिला पत्रकार नहीं है। वहां पर केवल आदमी ही इस वक्‍त काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं तालिबान ने यहां पर कब्‍जे के बाद कई प्रोग्राम भी बदल दिए हैं और अपने अनुसार ही उनको ब्राडकास्‍ट भी करवा रहे हैं।

यह भी पढें   महिला सशक्तिकरण: प्रगतिशील और सफल समाज की आधारशिला : अधिवक्ता शिव गणेश कर्नाटी

खदीजा ने ये भी बताया कि जब तालिबानी आतंकियों ने उन्‍हें दफ्तर में जाने और काम करने की इजाजत नहीं दी तो उन्‍होंने इसकी शिकायत अपने डायरेक्‍टर से करने की कोशिश की थी। लेकिन इस दौरान उन्‍हें पता चला कि वो भी बदले जा चुके हैं और उनकी जगह तालिबान ने दूसरे व्‍यक्ति को ये जिम्‍मेदारी सौंप दी है। इस मुद्दे पर जब तालिबान से उनका रुख स्‍पष्‍ट करने को कहा गया तो उन्‍होंने कोई जवाब नहीं दिया।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *