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लोसपा द्वंद : महन्थ-राजेन्द्र ! मधेश में जितना नेता उतनी पार्टी ?

 

क्या नई पार्टी बनेगी ? मधेश में जितना नेता उतनी पार्टी

जनकपुरधाम, 27 जनवरी । जनकपुर में इनदिनों चौक चौराहे पर चर्चा जोड़ों पे है खासकर के लोसपा नेताओं को लेकर। चर्चा में मुख्यरूप से वर्तमान अध्यक्ष महंत ठाकुर और वर्तमान वरिष्ठ नेता मर्यादा कर्म में एक नम्बर पर रहे राजेन्द्र महतो को लेकर। लोगों का अनुमान है कि राजेन्द्र महतो और उनका ग्रुप अध्यक्ष महंत ठाकुर से काफी नाराज चल रहे हैं । जिसकी पुष्टि पिछले दिनों अध्यक्ष द्वारा बनाये गए जिला समिति और एक ग्रुप द्वारा हो रहे इसका विरोध से भी होती है ।

चर्चा अनुसार यह विरोध राजेन्द्र महतो के इशारे पर हो रहा है। अध्यक्ष पक्ष का मानना है कि यह सामान्य गतिरोध है और इसे सुलझा लिया जायेगा । उधर अपने को लोसपा के सिपाही कहने वाले हिंदी अभियानी नेता रमण कुमार पांडेय का कहना है कि लडाई ग्रुप की नही है सिद्धांत का है । पांडेय का मानना है कि एकल नेतृत्व और सामुहिक निर्णय से ही पार्टी एवं अध्यक्ष को चलना चाहिए। ये लोग अपनी मांग पूरा करवाने पर अडिग हैं । उधर महंत ठाकुर कुछ सुनने को तैयार नही हैं । वो अपना निर्णय बदलने को बिलकुल ही नहीं दिख रहे हैं। चर्चा में है कि महन्तजी यह अडिग पहले हुये रहते तो राजपा से अलग होने की नौबत ही नहीं आती। अचानक आई इस शक्ति को लोग आश्चर्य भी मान रहें हैं। उधर बड़ी मसक्क्त से एकबार उपप्रधानमंत्री बन चुके राजेन्द्र महतो अपना दैनिक कार्यक्रम गजेंद्र बाबु के नाम पर बनी एक संस्था के मार्फत शुरू कर चूकें हैं ।

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क्या नई पार्टी बनेगी ? मधेश में जितना नेता उतनी पार्टी ।

कुछ चर्चा ऐसीभी है कि जल्द ही एक नई पार्टी बनने की खबर मधेश से आ सकती है।
नेताओं में मनमुटाव तो उसी समय से चलरहा है जब राजेन्द्र महतो को राजपा में संसदीय दल का नेता बनाया गया था। और अभी महतो लोसपा में वरिष्ठ नेता हैं । दूसरा वरिष्ट नेता शरद सिंह भंडारी को बनाया गया है। लेकिन अनिल झा 31 सदस्यों में चौथे नम्बर में है। पहले एकबार पार्टी प्रमुख बनचुके अनिल झा की नाराजगी इससे भी है।

एक अंदरूनी लड़ाई का जड़ यह भी है कि संसदीय दल के नेता कौन बनेंगें राजेन्द्र व महन्थ ? चर्चा में है कि दोनों नेता इस पद के लिए इक्छुक हैं। अब चुकि महंत ठाकुर को लोसपा से हटाना मुश्किल है इसलिए नेता अपनी अपनी अलग रस्ता बना रहें हैं । चर्चा में यह बात भी जोड़ो पर है कि अगर राजेन्द्र महतो अलग होतें हैं तो इसका भरपाई हृदेश त्रिपाठी भर सकतें हैं । हृदेश त्रिपाठी की नया पार्टी खोलने में महन्तजी का मौन समर्थन रहा है। बाद में महंत और हृदेश मिल सकतें हैं। वैसे हृदेश और राजेंद्र को एक ही पार्टी में रहना पहले से ही मुश्किल हो रहा है । दोनों अपने को शेर समझते हैं और दो शेर एक जगह नहीं रह सकता।

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इधर एक और बिल्कुल ही नईं चर्चा जोड़ों पर है की एक नई पार्टी खुल सकती है जिसका नेतृत्व डा विजय कुमार सिंह और वृखेश चंद लाल करने वाले है। जल्द ही इसकी घोषणा होने वाली है । इस पार्टी का नाम रहेगा तमलोपा । इस पार्टी का दर्ता पहले ही हो चुका है।

उधर राजेन्द्र महतो के इशारे पर नेपाल सदभावना पार्टी पहले से ही तैयार है जिसका चुनाव चिन्ह पंजा छाप ही है । यह पार्टी फंक्शन में है कुछ ही दिन पहले बद्री प्रसाद मंडल उसमें शरीक हुए थे।
उधर महन्थ ठाकुर सुनने को तैयार नही है। आंदोलन के बाद भी समिति विस्तार जारी है। फिर आइये बात करतें हैं सोनल साहब की तो जितेंद्र सोनल किसीसे कम नही हैं ।  अंदर ही अंदर पार्टी पर अपनी पकड़ बना रहे हैं । ख़बड़ के आनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS भारत के हेड ऑफिस नागपुर और दिल्ली का दौड़ा कर आशीर्वाद लेने में व्यस्त हैं। मधेश प्रदेश के संसदीय दल के नेता और प्रमुख में चयन के बाद नेतृत्व का स्वाद अब इन्हें भी पता चल गया है ।

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अनिल झा की बात करें तो इनके बारे में कहा जाता है कि कभी इधर और कभी उधर का इंतजार कर रहें हैं । ये करीब करीब चुप्पी की स्थिति में हैं ।

खेमा बदलने में जिस तरह मनीष सुमन , लाल किशोर, प्रमोद शाह नवल किशोर शाह सभी राजेन्द्र महतो का साथ छोड़ चुके हैं उसी तरह सुरिता शाह भी शरद जी के साथ जाने को दिख रही है। ये सभी राजेन्द्र महतो का हनुमान माने जाते थे।
तो इस तरह देखा जारहा है कि जल्द ही मधेशियों को कोई न कोई नई पार्टी मिल सकती है । ( हिमालिनी )

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