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आनन्द , तड़प, विरह, योग , राग अनुराग की चरम इबादत है कविता : इन्दु तोदी

 

*कविता*

कलम से कागज का अनुठा अनुराग है कविता ,
भावनाओं के उमड़ घुमड़ बादलों का रास है कविता , 
जो धरती से मिल पाए कभी
तो कभी आकाश मे ही विलिन हो जाए
वो तृप्त तो कभी अतृप्त प्यास है कविता।
जैसे चांद बिना की रात ,
अधुरे सारे सुर और साज है बिन कविता ।
कभी भटके दूर दूर  
तो कभी निकट अति पास है कविता।
कभी जख्म पे मरहम
तो कभी हमदम और दमखम है कविता ।
हो जब दिल जार जार ,
रहे निकट अति पास
सहलाती है जज़्बात,
सहेली अजीज बड़ी खास है कविता।
आकाश से परे ,समुद्र तल से तले,
सूरज से तेज ,
वायु से अधिक जिस का वेग,
नाजुक भावों को रखती सहेज
निकट कुछ खास वो है कविता ।
भटके को राह दर्शाती ,आहत मन में राहत बरपाती , सहलाती,संभालती है कविता ।
निराशा में प्रकाश ,
अधीर मन को दे आश,
कड़ी धुप मे शीतल आभास है कविता।
कभी गीत, कभी गजल,कभी भजन,कभी
प्रेम और सौन्दर्य तो कभी प्रीतम का स्पर्श
है कविता।
कभी विभिषिका तो कभी भिषण द्वन्द और रण तो कभी शान्त सुरम्य वन है कविता ।
आंचल की छांव सी, बचपन के गाँव सी
मखमली ख्वाब सी, कड़कडाते पौष में गरम ताव सी है कविता ।
कवि की साधना , परम पिता की आराधना , मिलन आत्मा से परमात्मा,
आनन्द , तड़प, विरह, योग , राग अनुराग की चरम इबादत है कविता ।
निर्गुण निराकार सी तो कभी सगुण साकार सी, ध्यान,जप , तप और ईश्वर की सच्ची आराधना है कविता ….

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इन्दु तोदी, धरान, नेपाल |

 

 

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