दुर्गा का नौवां रुप सिद्धिदात्री, आज नवमी है यानी अंतिम पूजा
कंचाना झा, काठमांडू, ४ अक्टूबर – दशहरा जिसे हम बहुत उमंग और उत्साह के साथ मना रहें हैं । प्रत्येक घर माँ भगवती की अराधना में लीन हैं । कहते हैं न कि बेटियां बहुत दिन तक अपने मैके में नही. रहती तो ठीक वैसे ही देखते देखते माँ भगवती के विदाई का समय निकट होता जा रहा है । आज नवमी है यानी अंतिम पूजा । कल देवी की विदागरी होगी । दुर्गा नवमी को महानवमी भी कहा जाता है । देवी के नौवें रुप को सिद्धिदात्री कहा जाता है ।
कहते हैं माँ भगवती का यह रुप हमें जीवन में अद्भूत सिद्धि, क्षमता प्रदान करती हैं ताकी हम सबकुछ पूर्णता के साथ कर सकें । सिद्धि, सम्पूर्णता का अर्थ है– विचार आने से पहले ही काम का हो जाना । विचारमात्र से ही बिना किसी कार्य किए ईच्छा का पूर्ण हो जाना यही सिद्धि है । माता के इस रुप की पूजा से हमारे सभी ईच्छाओं की पूर्ति हो जाती है । माँ दुर्गा का उह अत्यंत शक्तिशाली स्वरुप है ।देवी दुर्गा का यह रुप समस्त देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है । असुर महिषासुर के अत्याचार से परेशान होकर सब देवगण भगवान महादेव और विष्णु के पास सहायता के लिए जाते हैं । वहाँ उपस्थित सभी देवगणोंसे एक एक तेज उत्पन्न हुआ । उस तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ । जिन्हें सिदे्धिदात्रि के नाम से जाना गया ।
शास्त्रों में माँ सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष की देवी माना गया है । माँ सिद्धिदात्री महालक्ष्मी के समान कमल पर विराजमान हैं माँ के चार हाथ हैं । माँ ने अपने हाथों में शंख, गदा कमल का फूल और चक्र धारण किया हुआ है । इन माँ को सरस्वती का रुप भी माना गया है । माँ सिद्धिदात्री हम सबकी मनोकामना को पूर्ण करें । जय माँ भवानी ।



