4 नवम्बर शुक्रवार को हरिप्रबोधिनी एकादशी

आचार्य राधाकान्त शास्त्री *हरि प्रबोधिनी एकादशी 4 नवंबर शुक्रवार को है और पारण 5 नवम्बर शनिवार को प्रातः से किया जाएगा।*
जो कि सभी विष्णु भक्तों के लिए सभी व्रतों से अधिक शक्ति शाली और महत्वपूर्ण तथा शुभ है, किन्तु कुछ समाज को भ्रमित करने वाले लोग शुक शनिचरी को लेकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। जो सर्वथा निराधार है। एकादशी शुक्रवार को है। और अगले दिन शनिवार को पारण करना श्रेष्ठ रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार हरिप्रबोधिनी एकादशी महाव्रत करने का बहुत ही महत्वपूर्ण फल होता है। और इसमे कोई दोष नही होता, यह एकादशी अति श्रेष्ठ एवं विशेष फलदायी है। जिसे कुछ नही करना वही लोग इस तरह का अफवाह उठाते हैं।
*श्रीहरिप्रबोधिनी एकादशी व्रत इस वर्ष 04 नवम्बर शुक्रवार को किया जायेगा और पारण 05 नवम्बर शनिवार को सुर्योदय के बाद करना है‼️*
लेकिन कुछ अज्ञानियो द्वारा समाज मे यह भ्रम फैला दिया गया है की शुक्रवार को एकादशी और शनिवार को पारण होने से दोष है। इस भ्रम को दुर करने के लिए आज मै *निर्णयसिन्धु* मे पेज नंबर 65 से 81 तक *एकादशी व्रत निर्णय* का अध्ययन किया, जिसमे मुझे दशमी युक्त एकादशी करने का दोष तो मिला लेकिन यह तथाकथित *शुक शनिचरी एकादशी* का कही जिक्र नहीं है। जबकि एकादशी व्रत निर्णय मे ये स्पष्ट कहा गया है-
*सूर्ये वा सूर्यपुत्रे वा धरणीसुतवासरे।*
*निराहारं न कुर्वीत यदीच्छेत्पुत्रजीवनम्।।* *मच्छयने मदुत्थाने मत्पार्श्व परिवर्तने।*
*निर्जलायां तथा देवोत्थानी वारदोषो न विद्यते।।*
अर्थात- देवोत्थान एकादशी,हरिशयनी एकादशी तथा निर्जला भीमसेनी एकादशी में शुक्रवार शनिवार यानि वार दोष नही लगता है। अतः यह एकादशी व्रत सबके करने योग्य है, इसलिए किसी के कहने पर व्रत का परित्याग नही करें।
*कार्तिक माह के शुक्लपक्ष की इस एकादशी को श्रीहरि प्रबोधिनी* एकादशी नाम से जाना जाता है। पद्मपुराण के अनुसार इस एकादशी व्रत को रखकर परमेश्वर श्रीविष्णु की भक्तिभाव से पूजा-आराधना करने से प्राणी समस्त पापों से मुक्त हो जाते है। कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी व्रत का फल सौ राजसूय यज्ञ तथा एक सहस्र अश्वमेध यज्ञ के फल के बराबर होता है। देवोत्थान एकादशी के दिन व्रतोत्सव करना प्रत्येक सनातनधर्मी का आध्यात्मिक कर्तव्य है। इस एकादशी के दिन भक्त श्रद्धा के साथ जो कुछ भी जप-तप और स्नान-दान करते हैं, वह सब अक्षय फलदायक हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। रात्रि जागरण तथा व्रत रखने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं तथा व्रती मरणोपरान्त बैकुण्ठ जाता है।
मठों, मंदिरों, वैष्णवों और श्री हरि के परम भक्तों के लिए यह बिल्कुल निराधार और भ्रमित बात है, सभी एकादशी करने योग्य होता है, चुकी 24 सामान्य एवं 2 पुरुषोतमी एकादशी बड़े भाग्य से करने को मिलता है इस व्रत के करने में कोई टिका टीपड़ी नही और और 4 नवंबर शुक्रवार को व्रत करने से कोई परहेज नही, सभी एकादशी का अपना अलग अलग नाम और महत्व है, अतः विष्णु भक्तों के लिए सभी प्रकार के एकादशी महत्वपूर्ण है। कुछ मूर्ख तो ये भी कह कर भ्रम उत्पन्न कर देते हैं कि यह पचका में पड़ गया है, उनको पता नही की ये एकादशी हमेशा पचका में ही पड़ता है, व्रत करने वाले के लिए व्रत और संकल्प आवश्यक हैं।
अब आवश्यकता है
धर्म के प्रति अग्रसर समाज के प्रवर्तको का कर्तव्य है भटके हुए भ्रमित समाज को सही स्वरुप दिखाते हुए ऐसे कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए पुरजोर विरोध करे। और व्रत नही करने वाले के झूंठ मुठ के बहानाओं से बचें।
*श्री हरि विष्णु अपने चौबीसों अवतार के शक्ति के साथ हरि प्रबोधिनी एकादशी में अपने भक्तों सभी पापों को नष्ट कर सभी मनोकामना पूर्ण करें। एवं सबको उत्तम आयु आरोग्यता, सुख सौभाग्य, के साथ सम्पूर्ण प्रसन्नता प्रदान करें।*
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*
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