Fri. Jun 5th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ब्रिटेन (इंग्लैंड) से भी बातचीत कर रही है : प्रधानमंत्री बालेन्द्र

 

काठमांडू।

नेपाल–भारत के बीच सीमा विवाद को लेकर नया मोड़ सामने आया है। लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा सहित विवादित सीमा क्षेत्रों को लेकर चल रहे मतभेद के बीच प्रधानमंत्री वालेन्द्र (बालेन) शाह ने एक नया मुद्दा उठाया है।

रविवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में सांसदों द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री बालेन ने कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा से जुड़े सीमा विवाद को कूटनीतिक संवाद के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की जा रही है और इसके लिए नेपाल सरकार ब्रिटेन (इंग्लैंड) से भी बातचीत कर रही है।

प्रधानमंत्री बालेन ने कहा,
“लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के विषय में नेपाल सरकार ने आधिकारिक रूप से भारत सरकार को डिप्लोमैटिक नोट भेजा है और उसका जवाब भी आ चुका है। दोनों देशों ने इतिहासकारों और सर्वेयरों की संयुक्त टोली बनाकर बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने पर सहमति जताई है। चूंकि यह विवाद ब्रिटिश इंडिया के समय से चला आ रहा है, इसलिए नेपाल सरकार ने इंग्लैंड सरकार से भी इस विषय में संवाद किया है। इसका समाधान कूटनीतिक तरीके से ही निकलेगा।”

यह भी पढें   नेकपा एमाले ने सभामुख द्वारा बोले गए कुछ शब्दों को संसदीय रिकॉर्ड से हटाने की मांग की

गौरतलब है कि 1947 में ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बाद भारत स्वतंत्र हुआ था। उस समय सुगौली संधि के आधार पर तय सीमा को ही नेपाल और भारत के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा माना गया था। ब्रिटिश इंडिया द्वारा निर्धारित सीमा रेखा को स्वतंत्र भारत ने भी जारी रखा। माना जा रहा है कि नेपाल सरकार उसी ऐतिहासिक आधार को ध्यान में रखकर ब्रिटेन से बातचीत कर रही है।

नेपाल–भारत सीमा का मुख्य आधार आज भी 1816 की सुगौली संधि को माना जाता है, जो नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री बालेन के बयान से यह स्पष्ट होता है कि नेपाल सरकार यह जानने की कोशिश कर रही है कि ब्रिटेन ने भारत छोड़ते समय सीमा की स्थिति किस प्रकार निर्धारित की थी।

यह भी पढें   लामिछाने का भारत भ्रमण

नेपाल में सीमा विवाद के मुद्दे पर पहले भी विभिन्न राजनीतिक दल, विशेष रूप से कम्युनिस्ट दलों के नेता, समय-समय पर सुगौली संधि का उल्लेख करते रहे हैं। संसद में भी कई बार यह मांग उठती रही है कि नेपाल–भारत सीमा का निर्धारण सुगौली संधि के आधार पर होना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री स्तर से संसद में इस प्रकार ब्रिटेन का उल्लेख करते हुए बयान दिया जाना पहली बार माना जा रहा है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *