मैं बातें करता हूँ अतीत से वर्तमान से और कल से भी, क्योंकि मैं जीता हूँ इनके बीच ही : बसंत चाैधरी
खामोशी जब बोलती है
मैं कभी तन्हा नहीं होता
साथ मेरे होती है
मेरी तन्हाई
और उस तन्हाई से
अनगिनत बातें करता हूँ मैं,
घेर लेता हूँ खुद को
अकथनीय संवादों के बीच
वो संवाद जो खामोश होते हैं और
जिन्हें सिर्फ मैं सुनता हूँ,
मैं बातें करता हूँ अतीत से
वर्तमान से, और कल से भी
क्योंकि मैं जीता हूँ इनके बीच ही
हर पल, हर क्षण
बिना रुके, बिना डिगे ।
मैं संवाद करता हूँ उनसे
जो साथ हैं और
उनसे भी जो खो गए
वक्त की दौड़ में कहीं
क्योंकि वो ही हैं
मेरे होने की वजह
और उनसे ही हैं मेरी साँसें
हाँ ! मेरे साथ जब मैं होता हूँ
तो बोलती हैं मेरी खामोशी भी
और दे जाती है कई अर्थ
मेरे मौन होते व्यक्तित्व को,
खामोशी जब बोलती है
तो मैं मिलता हूँ खुद से
और पाता हूँ खुद को
खुद में ही मुखर मौन के साथ ।


