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सप्तरी के ‘जायंट किलर’ ई. रामजी यादव अब देश के ‘श्रम सारथी’: डॉ. सीके राउत को हराने वाले युवा नेता बने श्रम मंत्री

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ramji-yadavनेपाल की राजनीति में इन दिनों एक ही नाम की गूँज है— ई. रामजी यादव। सप्तरी-2 के चुनावी मैदान में दिग्गज नेताओं के किलों को ध्वस्त करने वाले रामजी यादव को अब नेपाल सरकार में श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि जिस निर्वाचन क्षेत्र से पिछली बार डॉ. सीके राउत ने बड़ी जीत दर्ज की थी, उसी क्षेत्र से पहली बार में चुनाव जीतकर रामजी न केवल सांसद बने, बल्कि सीधे कैबिनेट मंत्री की कुर्सी तक पहुँच गए।

📉 ‘हेवीवेट’ नेताओं का पतन, रामजी का उत्थान

सप्तरी-2 के चुनाव परिणाम ने पूरे देश को चौंका दिया था। कभी मधेस की राजनीति के ‘पोस्टर बॉय’ माने जाने वाले जनमत पार्टी के अध्यक्ष डॉ. सीके राउत को जनता ने इस बार तीसरे स्थान पर धकेल दिया। राउत को मात्र 9,880 मत मिले, जबकि 28,404 मतों के साथ रामजी यादव ने प्रचंड जीत हासिल की। उन्होंने न केवल सीके राउत को हराया, बल्कि जसपा के कद्दावर नेता उमेश यादव को भी पीछे छोड़ दिया।

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💼 पहली ही कोशिश में ‘मंत्री पद’: सीके राउत जो न कर सके, रामजी ने कर दिखाया

राजनैतिक गलियारों में इस बात की सबसे अधिक चर्चा है कि जहाँ डॉ. सीके राउत पिछली बार चुनाव जीतकर भी सत्ता के समीकरणों के कारण मंत्री पद से दूर रहे, वहीं रामजी यादव ने अपनी पहली ही पारी में मंत्रालय की जिम्मेदारी हासिल कर ली। एक साधारण पृष्ठभूमि और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आने वाले युवा का श्रम मंत्री बनना यह दर्शाता है कि नेपाल की राजनीति अब ‘डिग्री और डेलिभरी’ (योग्यता और परिणाम) को प्राथमिकता दे रही है।

सीके राउत के गढ़ में रामजी यादव ने कैसे रचा इतिहास ?


🛠️ श्रम मंत्रालय ही क्यों? (चुनौतियाँ और उम्मीदें)

रामजी यादव का श्रम मंत्री बनना सप्तरी और पूरे मधेस के लिए विशेष मायने रखता है:

  1. वैदेशिक रोजगार का संकट: मधेस का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों में मजदूरी करने जाता है। एक इंजीनियर होने के नाते, रामजी से उम्मीद है कि वे इस क्षेत्र में तकनीक और पारदर्शिता लाएंगे।

  2. दक्षता विकास (Skill Development): चुनाव के दौरान उन्होंने ‘तकनीकी शिक्षा’ का वादा किया था। अब श्रम मंत्री के रूप में वे युवाओं को स्किल्ड बनाकर बेहतर नौकरियों के अवसर पैदा कर सकते हैं।

  3. श्रमिकों की सुरक्षा: विदेशों में पसीना बहा रहे नेपाली श्रमिकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाना उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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🗣️ जनता में उत्साह: “सप्तरी का मान बढ़ा”

राजविराज के स्थानीय युवाओं का कहना है, “हमने रामजी को इसलिए चुना था क्योंकि वे हमारी भाषा (इंजीनियरिंग और विकास) समझते हैं। अब उनके मंत्री बनने से हमें उम्मीद है कि हमारे जिले से होने वाला पलायन रुकेगा और युवाओं को घर में ही काम मिलेगा।”

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