Mon. Sep 21st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अवैध शक्ति केंद्रों का खतरा: लोकतंत्र के लिए एक चुनौती

 

काठमांडू, 15 अप्रैल 025 । सत्तारूढ़ राजनीतिक दल और सरकार के बीच स्वस्थ संबंध सुशासन के लिए आवश्यक होते हैं, लेकिन इन दोनों के बीच स्पष्ट सीमाओं को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। जब यह सीमा टूटती है, तो राजनीतिक दलों के भीतर अनौपचारिक शक्ति केंद्र उभरते हैं—जिनका नेतृत्व अक्सर ऐसे प्रभावशाली लोग करते हैं जो सरकार में औपचारिक भूमिका में नहीं होते। यह स्थिति लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर कर देती है।

गगन थापा, जो नेपाली कांग्रेस के महासचिव हैं, और UML के कुछ अन्य नेताओं पर विभिन्न मंत्रालयों और प्रांतीय सरकारों में नियुक्तियों और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करने के आरोप लगे हैं। ये निर्णय अक्सर आधिकारिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करके लिए जाते हैं। इस प्रकार की कार्रवाइयाँ समानांतर सत्ता संरचनाओं का निर्माण करती हैं, जो औपचारिक शासन को कमजोर करती हैं और जनता के विश्वास को क्षति पहुँचाती हैं।

यह भी पढें   अपर त्रिशूली थ्री ए सुरंग से ६ शव बरामद

ये अनौपचारिक प्रभाव केंद्र अक्सर हित समूहों, सत्ता दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों के अड्डे बन जाते हैं, जो जनहित की बजाय निजी या गुटीय हितों को प्राथमिकता देते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में 2000 के दशक की शुरुआत में कुछ पार्टी नेताओं ने सरकार में रहते बिना नौकरशाही नियुक्तियों पर प्रभाव डाला, जिससे पक्षपात और अक्षमता के आरोप लगे। पाकिस्तान में भी राजनीतिक दलों से जुड़े अनौपचारिक नेटवर्क ने न्यायिक और प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित किया है, जिससे अस्थिरता और अविश्वास फैला।

नेपाल में थापा पर लगे हस्तक्षेप के आरोप ऐसी संरचना को जन्म दे सकते हैं जिसमें योग्यता की जगह गुटीय निष्ठा को महत्व दिया जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि अयोग्य व्यक्ति महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त हो जाते हैं, जिससे नीतियों का क्रियान्वयन और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

यह भी पढें   वित्तमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले और निर्मला सीतारमण बीच मुलाकात

इस तरह के हस्तक्षेप के दुष्परिणाम दूरगामी होते हैं। इससे योग्य पेशेवर सार्वजनिक सेवा से दूर रहते हैं, क्योंकि वे इसमें निष्पक्षता की कमी देखते हैं। जब निर्णय पारदर्शिता की बजाय छिपे हुए एजेंडों से प्रभावित होते हैं, तो जनता का संस्थाओं पर विश्वास घटता है। भ्रष्टाचार बढ़ता है क्योंकि सत्ता दलाल अपने प्रभाव का उपयोग वित्तीय या राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं। इससे पार्टी के भीतर भी गुटबाजी और तनाव बढ़ता है, जिससे शासन प्रक्रिया ठप हो सकती है।

यह भी पढें   रिश्तों की उम्र संपर्क से नहीं, संवाद और विश्वास से बढ़ती है : बिमल सरार्फ

इस समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दलों के अध्यक्षों को औपचारिक शासन संरचनाओं को सशक्त करना होगा। नियुक्तियों और नीतिगत निर्णयों के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू करना होगा ताकि वे केवल निर्वाचित अधिकारियों और अधिकृत निकायों के अधिकार क्षेत्र में रहें। नियमित ऑडिट और सार्वजनिक जानकारी का खुलासा भी छिपे हुए हस्तक्षेप को रोकने में मदद कर सकता है।

अगर इन मुद्दों को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो नेपाल में एक ऐसा तंत्र विकसित हो सकता है जहां जवाबदेही हाशिए पर चली जाए और लोकतंत्र सिर्फ कुछ लोगों के नियंत्रण में एक दिखावा बनकर रह जाएगा। राकेश मिश्रा के स्टेटस और हिंदी अनुदित ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com