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ब्याज दर घटेगी, कर्ज़ में बढ़ोतरी होगी: नेपाल की नई मौद्रिक नीति से बैंकिंग सेक्टर को राहत

 
विश्वनाथ पॉडेल
गवर्नर, नेपाल राष्ट्र बैंक

काठमांडू, असार २८, २०८2 । नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर विश्वनाथ पौडेल ने अपने कार्यकाल की पहली मौद्रिक नीति जारी करते हुए आगामी आर्थिक वर्ष २०८२/८३ के लिए अर्थतंत्र में गति लाने की दिशा में एक उदार रुख अपनाया है। इस नीति में ब्याज दरों को घटाने, कर्ज़ विस्तार को बढ़ाने और बैंकिंग क्षेत्र को राहत देने की विस्तृत योजना पेश की गई है।

मुख्य बातें:

  • निजी आवासीय घर के लिए कर्ज़ सीमा २ करोड़ से बढ़ाकर ३ करोड़
  • शेयर धितो कर्ज़ की सीमा १५ करोड़ से बढ़ाकर २५ करोड़
  • कृषि और व्यवसाय के लिए १० लाख तक के कर्ज़ का प्रावधान
  • साना तथा मझौला उद्यमियों के लिए ३ करोड़ तक सस्ते कर्ज़
  • ब्याज दर करिडोर को नीचे लाने की घोषणा
  • विदेश यात्रा के लिए सटही सुविधा २५०० से बढ़ाकर ३००० अमेरिकी डलर

नीति का उद्देश्य क्या है?

इस नीति के तहत गवर्नर पौडेल ने स्पष्ट किया कि कम ब्याज दर और अधिक तरलता के बावजूद सरकारी और निजी क्षेत्र को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसलिए अब रियल एस्टेट, शेयर बाजार, कृषि, उद्योग और साना-मझौला उद्यमों में कर्ज़ विस्तार को प्राथमिकता दी गई है।

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विशेषज्ञों की राय बंटी हुई

जहाँ निजी क्षेत्र ने इस नीति को उत्साहजनक बताया है, वहीं कई अर्थशास्त्रियों ने इसे वित्तीय स्थायित्व के लिहाज से जोखिम भरा करार दिया है। उनका मानना है कि निक्षेपकर्ता के हितों की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है और कई क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा लचीलापन दिखाया गया है।

पूर्व गवर्नर महाप्रसाद अधिकारी द्वारा कोविडकाल में दी गई कई छूटें इस नीति में फिर से शामिल की गई हैं, जिनका कार्यान्वयन अब नए सिरे से किया जाएगा।

ब्याज दरों में बदलाव

  • नीतिगत दर: ५% से घटाकर ४.५%
  • ब्याज दर करिडोर की ऊपरी सीमा (बैंक दर): ६.५% से घटाकर ६%
  • निचली सीमा (निक्षेप संकलन दर): ३% से घटाकर २.७५%
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इन बदलावों से कर्ज़ सस्ता होगा और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

बैंकिंग क्षेत्र को क्या मिला?

  • दो वर्ष तक गैर-बैंकिंग सम्पत्ति से प्राप्त ‘रेगुलेटरी रिजर्भ’ को पूरक पूंजी में गिनने की अनुमति
  • चालू पूंजी कर्ज मार्गदर्शन को लचीला बनाना
  • कर्ज़ वर्गीकरण और क्षतिपूर्ति व्यवस्था की पुनरवलोकन की योजना
  • चेक बाउन्स से ब्लैकलिस्ट में आने वाले व्यवस्था में सहजीकरण
  • शेयर कर्ज सीमा में वृद्धि से शेयर बाजार को भी राहत

लघुवित्त और ग्रामीण क्षेत्र की प्राथमिकता

  • लघुवित्त संस्थाओं के लाभांश वितरण पर पुनरावलोकन
  • वैदेशिक रोजगार के लिए बिना धितो ३ लाख तक और महिलाओं को ५ लाख तक कर्ज़
  • कृषि फसल, खेती योग्य भूमि या संरचना को धितो माने बिना १० लाख तक कर्ज़ का प्रावधान
  • उद्योग-व्यवसाय की प्रकृति अनुसार चालू पूंजी कर्ज में लचीलापन
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डिजिटल बैंकिंग और पहचान प्रणाली में सुधार

अब बैंकिंग सेवा प्रदायक संस्थाएं ग्राहक की जानकारी (KYC) राष्ट्रीय परिचयपत्र से जोड़ सकेंगी। एक बैंक में अद्यावधिक विवरण होने पर अन्य संस्थाएं भी उसे डिजिटल माध्यम से उपयोग कर सकेंगी।

निजी क्षेत्र की प्रतिक्रिया

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ, परिसंघ, चेम्बर अफ कमर्स और अन्य उद्योग संगठनों ने इस नीति को उत्साहजनक बताया है। उनका कहना है कि यह मौद्रिक नीति सुस्त अर्थव्यवस्था को गति देने का प्रयास है और खासकर साना तथा मझौला उद्यमों के लिए यह राहत भरी होगी।

नेपाल राष्ट्र बैंक की इस नई मौद्रिक नीति ने बैंकिंग, व्यवसाय और निवेश के क्षेत्र में लचीलापन लाकर बाजार को गति देने का प्रयास किया है। हालांकि इसके प्रभाव का मूल्यांकन नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद ही किया जा सकेगा। रिपोर्ट: यज्ञ बञ्जाडे, कांतिपुर के आधार पर।

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