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प्रधानमंत्री ओली की भारत यात्रा की तैयारी तेज, भारत-नेपाल संयंत्र फिर सक्रिय

 

काठमांडू, 30 जुलाई 2025। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले नेपाल–भारत द्विपक्षीय संयंत्र पुनः सक्रिय हो गए हैं। 9 वर्षों से ठप पड़े गृह सचिव स्तर की बैठक और 6 वर्षों से लंबित सीमा कार्यदल की बैठक हाल ही में फिर से आयोजित की गई। यह कूटनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है।

दिल्ली में गृह सचिव बैठक

गत सप्ताह भारत की राजधानी दिल्ली में हुई गृह सचिव स्तर की बैठक में सीमापार अपराध, नशीली दवाओं की तस्करी रोकथाम, सुरक्षा सहयोग, और सूचना आदान-प्रदान जैसे विषयों पर चर्चा हुई। नेपाल के गृह प्रवक्ता रामचंद्र तिवारी के अनुसार, दोनों देशों ने सीमा पार अपराधों पर संयुक्त नियंत्रण के लिए कार्यनीति विकसित करने पर सहमति जताई।

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सीमा कार्यदल की बैठक

साउन १२–१३ (26-27 जुलाई) को भारत में नेपाल-भारत सीमा कार्यदल की बैठक हुई, जो पिछली बार 2019 में बैठी थी। इस बैठक का उद्देश्य सीमा स्तम्भों की मरम्मत, पुनर्निर्माण, और सर्वेक्षण में तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करना था।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। दोनों पक्षों ने सीमा निगरानी के लिए नई तकनीकों के उपयोग और दशगजा क्षेत्र की साफ-सफाई पर भी सहमति जताई।

विवादित नक्शे पर चर्चा नहीं

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नेपाल द्वारा प्रकाशित नया नक्शा (जिसमें लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेक को शामिल किया गया है) पर इस बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई। नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय के अनुसार, सीमा कार्यदल का दायरा सिर्फ भौतिक सीमांकन और स्तम्भों की निगरानी तक सीमित है, न कि विवाद समाधान तक।

आगामी बैठक नेपाल में

अगस्त महीने में नेपाल में एक उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है, जिसमें प्रधानमंत्री ओली की यात्रा से पहले सीमा, सुरक्षा और कूटनीतिक तैयारी को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सुरक्षा सहयोग पर विशेष जोर

भारतीय गृह मंत्रालय ने बताया कि बैठक में सीमा पर एकीकृत जांच चौकियों, रेलवे व सड़क नेटवर्क, विपद् जोखिम न्यूनीकरण, और क्षमता विकास जैसे बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। साथ ही, दोनों देशों ने फौजदारी मामलों में कानूनी सहयोग और परिवर्तित प्रत्यर्पण संधि को अंतिम रूप देने की दिशा में भी प्रगति की

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अन्तमे

प्रधानमंत्री ओली की भारत यात्रा को लेकर नेपाल-भारत के बीच लंबे समय से निष्क्रिय संयंत्रों की पुनः सक्रियता एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश सीमा सुरक्षा, द्विपक्षीय सहयोग और कूटनीतिक विश्वास बहाली को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ठोस वार्ता अभी भी प्रतीक्षित है ।

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