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रास्वपा में बड़ा बदलाव: बालेन्द्र शाह को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पार्टी संविधान में संशोधन की तैयारी

 

काठमांडू, २९ फाल्गुन ०८२। नेपाल की राजनीति में तेजी से उभरती शक्ति बन चुकी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) अब सरकार गठन की दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रही है। पार्टी अपने आंतरिक विधान में संशोधन कर वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह को संसदीय दल का नेता चुनने की तैयारी कर रही है, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।

विधान बदलने की तैयारी क्यों ?

रास्वपा के मौजूदा विधान (२०७९) की धारा 66 के अनुसार संसदीय दल के नेता का चुनाव पार्टी के सभी साधारण सदस्य करते हैं। लेकिन व्यवहार में यह व्यवस्था कभी लागू नहीं हो पाई।

इसी कारण पार्टी अब इस प्रावधान को संशोधित कर संसदीय दल के सांसदों के माध्यम से नेता चुनने की प्रक्रिया लागू करने जा रही है। संशोधन के बाद संसदीय दल का नेता सीधे सांसदों द्वारा चुना जाएगा।

भारी बहुमत के साथ सरकार की ओर

275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में रास्वपा को 182 सीटें मिलने के बाद सरकार बनाने की स्थिति बन गई है। जैसे ही संसदीय दल का नेता चुना जाएगा, रामचन्द्र पौडेल राष्ट्रपति के रूप में संविधान के प्रावधानों के तहत उस नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे।

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रास्वपा के भीतर इस पद के लिए वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह का नाम पहले से तय माना जा रहा है।

रवि लामिछाने और शाह के बीच लगातार चर्चा

पार्टी के केंद्रीय सभापति रवि लामिछाने और बालेन्द्र शाह के बीच समानुपातिक सांसद चयन, विधान संशोधन और सरकार गठन को लेकर लगातार बातचीत चल रही है।

हालांकि लामिछाने फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से आराम कर रहे हैं। उनके सचिवालय के अनुसार वे काठमांडू स्थित महाराजगंज शिक्षण अस्पताल में चिकित्सकीय फॉलो-अप के लिए भी गए थे और अभी चिकित्सकों की सलाह पर बेड रेस्ट में हैं। इसके बावजूद वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सरकार गठन की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।

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पार्टी के अंदर पहले से हुआ था समझौता

रास्वपा के भीतर 13 पुस को हुए एक समझौते में यह तय किया गया था कि पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने ही रहेंगे, जबकि चुनाव के बाद संसदीय दल का नेता और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन्द्र शाह होंगे।

इसी सहमति को औपचारिक रूप देने के लिए अब विधान संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

कब होगा संसदीय दल के नेता का चुनाव ?

निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों से तीन दिन के भीतर समानुपातिक सांसदों की सूची भेजने को कहा है। रास्वपा को इस श्रेणी से 57 सांसदों के नाम भेजने होंगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार:

पहले सचिवालय और केंद्रीय समिति की बैठक होगी

उसमें विधान संशोधन का निर्णय लिया जाएगा

इसके बाद सर्वसम्मति से बालेन्द्र शाह को संसदीय दल का नेता चुना जाएगा

प्रधानमंत्री नियुक्ति की प्रक्रिया

जैसे ही संसदीय दल का नेता चुना जाएगा, पार्टी राष्ट्रपति को औपचारिक सूचना देगी। इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत राष्ट्रपति बहुमत दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे।

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छोटी कैबिनेट बनाने की योजना

रास्वपा के भीतर प्रारंभिक चर्चा यह भी है कि नई सरकार का मंत्रिपरिषद छोटा और प्रभावी बनाया जाए।

पार्टी के एक नेता के अनुसार,

“मंत्रिपरिषद का आकार सीमित रखने और केवल सांसदों को ही मंत्री बनाने पर विचार हो रहा है। हालांकि अभी मंत्रियों के नाम पर कोई चर्चा नहीं हुई है।”

आगे की राजनीतिक तस्वीर

यदि रास्वपा अपनी योजना के अनुसार विधान संशोधन कर लेती है और संसदीय दल का नेता चुन लेती है, तो नेपाल में जल्द ही बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार का गठन संभव है।

यह कदम न केवल पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को स्पष्ट करेगा बल्कि नेपाल की नई राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है।

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