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कांग्रेस में बढ़ा आंतरिक विवाद: कार्यवाहक सभापति को लेकर बयानबाज़ी

 

काठमांडू, 30 मार्च 026 । नेपाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी के भीतर नेतृत्व और वैधानिकता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है और इसी बीच अनुशासन समिति की बैठक भी बुला ली गई है।

पार्टी के महामंत्री के नेतृत्व वाले पक्ष का कहना है कि पार्टी के संवैधानिक अंगों द्वारा लिए गए निर्णयों को सभी नेता और कार्यकर्ताओं को मानना चाहिए। उनके अनुसार लंबे समय से पार्टी में काम कर रहे नेताओं को भी मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

महामंत्री गुरुराज घिमिरे ने कहा कि कार्यवाहक सभापति के नाम पर बयान जारी करना “हास्यास्पद” है, क्योंकि वर्तमान समय में पार्टी में ऐसा कोई पद नहीं है। उनका कहना है कि कांग्रेस को एकजुट करना समय की आवश्यकता है और पार्टी की वैधानिकता जहाँ है, सभी नेताओं को वहीं खड़ा होना चाहिए। उन्होंने बताया कि पार्टी इस विषय पर चर्चा कर रही है और अनुशासन समिति की बैठक भी बुलाई गई है।

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दूसरी ओर, पूर्व सभापति के निकट माने जाने वाले नेता जितजंग बस्नेत ने कहा कि विशेष महाधिवेशन के नाम पर पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश की गई, जो सही नहीं था। उनका कहना है कि उनका पक्ष 14वें महाधिवेशन की निरंतरता के आधार पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है और अदालत जो भी फैसला देगी, सभी को उसे मानना चाहिए।

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सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर दो धाराएँ स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। एक ओर नेतृत्व वाले गुट को विशेष महाधिवेशन से वैधानिकता मिलने के बाद आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है, वहीं पक्ष अदालत के फैसले तक समानांतर गतिविधियाँ जारी रखने की तैयारी में है। इसी क्रम में 14वें महाधिवेशन से निर्वाचित केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाने की भी तैयारी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा विशेष महाधिवेशन से निर्वाचित थापा नेतृत्व को आधिकारिक मान्यता दिए जाने के बाद देउवा पक्ष अदालत पहुंच गया था। 21 फागुन को हुए चुनाव में कांग्रेस को केवल 38 सीटें मिलने के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ा और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए थापा ने सभापति पद से इस्तीफा भी दिया था, हालांकि केंद्रीय कार्यसमिति ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया।

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इस बीच पार्टी ने 18 चैत को केंद्रीय अनुशासन समिति की बैठक भी बुलाई है। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय सानेपा में होने वाली इस बैठक में समानांतर गतिविधियों और चुनाव के दौरान हुए कथित अंतर्घात के मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। आवश्यकता पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अदालत के फैसले तक कांग्रेस के भीतर यह शक्ति संघर्ष और तेज हो सकता है।

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