Fri. Oct 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

सगरमाथा के ‘डेथ ज़ोन’ से 6 दिन बाद जिंदा मिले नेपाली गाइड, पर्वतारोहण कंपनियों की लापरवाही पर उठे सवाल

 

काठमांडू। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी सगरमाथा (एवरेस्ट) के अत्यंत खतरनाक ‘डेथ ज़ोन’ में लापता हुए नेपाली गाइड दावा शेर्पा (हिलारी) छह दिन बाद जीवित मिले हैं। ओखलढुंगा निवासी 56 वर्षीय दावा 15 जेठ (लगभग 29 मई) को सगरमाथा अभियान के दौरान लापता हो गए थे। सातवें दिन सुबह उन्हें खुम्बु आइसफॉल के पास ‘क्रैम्पोन प्वाइंट’ क्षेत्र में बेस कैंप की ओर घिसटते हुए पाया गया।

हिमालयी क्षेत्र में इतने लंबे समय तक अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी, भोजन-पानी और आश्रय के बिना जीवित रहना बेहद दुर्लभ माना जाता है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों और अनुभवी शेर्पाओं ने इस घटना को “चमत्कार” बताया है।

हेलिकॉप्टर से खोज, फिर बेस कैंप के पास मिले

दावा की तलाश के लिए बुधवार को काठमांडू से हेलिकॉप्टर भेजा गया था। खोज और बचाव अभियान में विशेषज्ञ पायलट कैप्टन विवेक खड्का और उनकी टीम ने सगरमाथा बेस कैंप से लेकर लगभग 7,300 मीटर ऊंचाई तक हवाई खोज की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया।

बृहस्पतिवार सुबह सगरमाथा प्रदूषण नियंत्रण समिति (SPCC) के कर्मचारियों ने दावा को बेस कैंप के नजदीक देखा और उनके साथी पासाङ दावा शेर्पा को सूचना दी। इसके बाद उन्हें गोरक्षेप लाया गया, जहां से हेलिकॉप्टर द्वारा पहले सुर्के और फिर काठमांडू स्थित ह्याम्स अस्पताल पहुंचाया गया।

यह भी पढें   नेपाल में भारी बारिश का कहर: बागलुङ में भूस्खलन से 10 लोगों की मौत, तनहुँ में 24 घर क्षतिग्रस्त

पोलिश पर्वतारोही ने लगाए गंभीर आरोप

दावा के जीवित मिलने की खुशी के साथ ही इस घटना ने अभियान संचालित करने वाली कंपनियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पोलैंड के पर्वतारोही मारुस सिमलेस्की, जो इसी अभियान का हिस्सा थे और इस समय शीतदंश (फ्रॉस्टबाइट) के कारण अस्पताल में उपचाररत हैं, ने अभियान प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अभियान अव्यवस्थित, खतरनाक और गैर-पेशेवर तरीके से संचालित किया गया।

मारुस के अनुसार, कैंपों की तैयारी अंतिम समय में की गई, संचार व्यवस्था कमजोर थी और भोजन-पानी की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऊंचाई वाले शिविरों में समय पर भोजन नहीं मिला और ऑक्सीजन प्रबंधन भी बेहद खराब था।

ऑक्सीजन की कमी और संपर्क टूटने का आरोप

मारुस ने बताया कि खराब मौसम के दौरान उनके पास ऑक्सीजन लगभग समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सात ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे थे, लेकिन प्रबंधन की अव्यवस्था के कारण पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो सकी।

यह भी पढें   नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 620 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप, विद्युत संरचना को भारी नुकसान

उनके मुताबिक, चौथे कैंप के बाद दावा शेर्पा के पास मौजूद वॉकी-टॉकी और सैटेलाइट फोन से संपर्क टूट गया था। इसके बावजूद अभियान संचालकों ने तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मीडिया से बात नहीं करने के लिए कहा गया था।

अनुभवहीन गाइड को भेजने का आरोप

मारुस ने दावा किया कि अभियान आयोजकों ने केवल अनुभवी शेर्पाओं को तैनात करने का आश्वासन दिया था, लेकिन दावा (हिलारी) को गाइड के रूप में भेजा गया, जबकि उन्होंने पहले कभी सगरमाथा शिखर पर चढ़ाई नहीं की थी।

दावा की बेटी मेन्दो शेर्पा ने भी बताया कि उनके पिता की भूमिका मूल रूप से कैंप-2 में खाना बनाने और प्रबंधन से जुड़ी थी। बाद में जनशक्ति की कमी के कारण उन्हें शिखर अभियान में शामिल किया गया।

कैसे बचे दावा?

परिवार के अनुसार, दावा ने बताया है कि चौथे कैंप के आसपास वे समूह से अलग हो गए थे। जीवित रहने के लिए उन्होंने तीसरे कैंप में छोड़ा गया भोजन खाया, बर्फीले गड्ढों में शरण ली और रास्ता खोजने की कोशिश करते रहे। उन्होंने यह भी बताया कि पर्वतारोहण मार्ग पर लगाए गए कुछ रस्से और सीढ़ियां हटा ली गई थीं, जिससे रास्ता पहचानना और कठिन हो गया।

यह भी पढें   नारायणी नदी के पुल में फंसे राइनो क्रूज़ शिप को हटाने का अभियान फिर शुरू

फिलहाल दावा आईसीयू में उपचाररत हैं। उनके हाथों की कुछ उंगलियां शीतदंश से प्रभावित हुई हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

सरकार ने शुरू की जांच

घटना के सार्वजनिक होने के बाद नेपाल में पर्वतारोहण कंपनियों के नियमन, लाइसेंस प्रणाली और सुरक्षा मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है। पर्यटन विभाग के महानिदेशक रामकृष्ण लामिछाने ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी कंपनी की लापरवाही साबित होती है तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि दावा के लापता होने के दौरान मार्ग से रस्सियां और सीढ़ियां हटाने में किसकी भूमिका थी।

यह घटना सगरमाथा पर्वतारोहण इतिहास की सबसे असाधारण जीवित बचाव घटनाओं में से एक मानी जा रही है, जिसने हिमालयी अभियानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com