Mon. Oct 19th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

भारत – नेपाल संबंधों में नई शुरुआत का संकेत : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक अप्रैल। नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने की हालिया भारत यात्रा केवल एक औपचारिक राजनीतिक दौरा भर नहीं थी, बल्कि उसने भारत–नेपाल संबंधों की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं । नेपाल में नई राजनीतिक व्यवस्था बनने के बाद यह अपेक्षा की जा रही थी कि प्रधानमंत्री बालेन शाह भारत यात्रा करेंगे, किंतु उनकी अनुपस्थिति में रवि लामिछाने का दिल्ली पहुंचना भी कम महत्वपूर्ण नहीं रहा । भारत में जिस स्तर पर उनका स्वागत हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, गृहमंत्री अमित शाह तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित शीर्ष नेतृत्व से उनकी मुलाकातें हुईं, उसने स्पष्ट कर दिया कि भारत नेपाल की नई राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था को गंभीरता से देख रहा है ।

नेपाल की राजनीति में लंबे समय से यह सवाल महत्वपूर्ण रहा है कि नई सरकार अपने पहले प्रमुख विदेश संपर्क में भारत और चीन के बीच किसे प्राथमिकता देती है । ऐसे समय में रवि लामिछाने की भारत यात्रा का विशेष महत्व है । यह यात्रा उस दौर में हुई जब नेपाल के भीतर राजनीतिक अस्थिरता और सीमा संबंधी बयानबाजी के कारण विपक्ष सरकार पर हमलावर था । इसके बावजूद भारत और नेपाल के बीच व्यावहारिक सहयोग के आठ सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा ने राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दी है ।

यह भी पढें   पर्यटक वीजा पर धार्मिक प्रचार और पादरी प्रशिक्षण का आरोप, 24 दक्षिण कोरियाई नागरिक नेपाल से निष्कासित

अध्यक्ष रवि लामिछाने ने अपनी यात्रा के दौरान जिस स्पष्टता से भारत–नेपाल संबंधों को “भू–राजनीतिक विवादों” से आगे बढ़ाकर विकास, निवेश, ऊर्जा, व्यापार और आर्थिक साझेदारी के नए ढांचे में देखने की बात कही, वह स्वागतयोग्य है । यह दृष्टिकोण दोनों देशों के पारंपरिक “रोटी–बेटी” संबंधों को आधुनिक आर्थिक साझेदारी में बदलने की संभावना प्रस्तुत करता है । विशेष रूप से सीमा विवादों को संवाद, ऐतिहासिक तथ्यों और आपसी समझदारी से हल करने की बात एक परिपक्व राजनीतिक संदेश माना जा सकता है ।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक: 15 अक्टुबर 2026 गुरुवार शुभसंवत् 2083

उनके द्वारा रक्सौल–काठमांडू रेल परियोजना, पोखरा और लुंबिनी से भारतीय शहरों तक सीधी उड़ानों, “काठमांडू–बेंगलुरु डिजिटल कॉरिडोर”, संयुक्त उर्वरक उद्योग, ऊर्जा बाजार और आधुनिक चेकपोस्ट जैसी योजनाओं पर जोर देना यह दर्शाता है कि नेपाल की नई पीढ़ी केवल राजनीतिक नारों से आगे बढ़कर ठोस आर्थिक परिवर्तन चाहती है । नेपाल की जलविद्युत क्षमता और भारत के विशाल बाजार के बीच सहयोग की संभावना दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती है ।

रवि लामिछाने का यह कहना कि नेपाल में परिवर्तन “बैलेट बॉक्स क्रांति” का परिणाम है, इस तथ्य को रेखांकित करता है कि नेपाली समाज अब विकास, सुशासन और जवाबदेही आधारित राजनीति की अपेक्षा कर रहा है । यही कारण है कि उनकी यात्रा को नेपाल के भीतर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है । कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गणतंत्र स्थापना के बाद पहली बार नेपाल का कोई प्रमुख नेता इतने स्पष्ट और व्यावहारिक एजेंडे के साथ भारत पहुंचा ।

यह भी पढें   सीजेपी आंदोलन: विदेशी फंडिंग के आरोप और भारत की स्थिरता का सवाल :श्वेता दीप्ति

हालांकि, किसी भी यात्रा की वास्तविक सफलता उसके बाद होने वाले क्रियान्वयन से तय होती है । भारत और नेपाल के संबंध केवल भावनात्मक निकटता तक सीमित नहीं रह सकते; उन्हें आर्थिक, तकनीकी और सामरिक सहयोग की ठोस संरचना में बदलना होगा । यदि दोनों देश रवि लामिछाने के प्रस्तावित एजेंडे पर गंभीरता से आगे बढ़ते हैं, तो यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और सहयोग का एक नया मॉडल भी प्रस्तुत कर सकता है ।
भारत और नेपाल के बीच विश्वास, पारदर्शिता और साझा विकास की यह नई पहल आने वाले समय में कितनी सफल होगी, यह दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा । फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इस यात्रा ने संवाद के नए द्वार खोल दिए हैं ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com