कहानी उस बिछडे परिवार की जो सोशल मीडिया के कारण फिर मिल सके: मालिनी मिश्र
मालिनी मिश्र, काठमांडू, २४ अगस्त | यह सच्ची कहानी उस परिवार की है जो लगभग ४० वर्षों तक एक दूसरे से अलग रहा । फ़ारिया 39 साल की हैं और उनका जन्म सोवियत रूस के लेनिनग्राद में हुआ था। उनकी मां रूस की हैं और पिता सैय्यद अहमद शरीफ़ सोमालिया के हैं, ।
फ़ारिया के जन्म के एक साल बाद ही सोमालिया और इथियोपिया के बीच जंग छिड़ गई। । शरीफ़ को रूस छोड़ना पड़ा।
फ़ारिया कहती हैं, मैं और मेरी मां उस वक़्त पश्चिमी साइबेरिया में अपनी नानी के पास थे। ।
।फ़ारिया जब बच्ची थीं तो हमेशा अपनी मां से पूछा करती थीं कि पिताजी कैसे दिखते हैंरु इस पर उनकी मां कहती थीं, ूआईना देख लो। तुम उन्हीं की तरह बात करती हो, उन्हीं की तरह चलती हो और उन्हीं की तरह तर्क भी करती हो।
फ़ारिया के पास अपने पिता की कुछ ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों के अलावा कुछ नहीं था। वो बताती हैं, मुझे पता है वो केवल परिस्थितियों के कारण ही वो हमें छोड़कर गए थे।
उन्होंने कई संस्थाओं से भी मदद हासिल करने की कोशिश की, लेकिन असफल रहीं।
फ़ारिया सबसे पहले रूस की एक सोशल मीडिया साइट पर एक महिला के संपर्क में आईं जो बिछड़े परिवारों को मिलाने में मदद करती थीं। लेकिन फ़ारिया के पिता सोमालिया में थे, इसलिए वह महिला फ़ारिया की कोई मदद नहीं कर पाईं।
फिर फ़ारिया ने इंस्टाग्राम पर सोमालिया की तस्वीरों को ढूंढना शुरू किया। उन्हें वहाँ डीक़ नाम का एक व्यक्ति मिला जिसके संपर्क दूर तक फैले हुए थे। डीक़ के सोमालिया सरकार में भी काफ़ी अच्छे संपर्क थे। इसलिए फ़ारिया ने मदद के लिए उन्हें मैसेज किया। इसी साल ज्ञट मार्च को डीक़ ने फ़ारिया के आग्रह को अपने फ़ेसबुक पेज पर पोस्ट किया। उसके बाद इस पोस्ट पर ढेर सारे क़मेंट आने लगे। ।
फिर फ़ारिया को फेसबुक मैसेज बॉक्स में एक संदेश मिला, बधाई हो हमने आपके पिताजी को ढूंढ लिया है।
वो कहती हैं, जब मुझे यह ख़बर मिली तो मुझे इस पर यक़ीन नहीं हुआ। यह एक सपने के सच होने जैसा था।
फिर अपने पिता से मिलने के लिए फ़ारिया अपने पति और मां के साथ नॉर्वे पहुंचीं। वो कहती हैं, वो ठीक वैसे ही थे, जैसा मैंने सोचा था। हम बिल्कुल एक जैसे चलते हैं, हमारी आवाज़ भी एक जैसी ही है।
फ़ारिया के मुताबिक, जब हमने पहली बार स्काइप पर बात की थी तो पिताजी ने मुझे बताया कि हमसे संपर्क करने के लिए उन्होंने भी बहुत कोशिश की थी।
वे लोग अब लगातार एक दूसरे से बात करते हैं। फ़ारिया अब अपने पिता से दोबारा मिलने की योजना बना रही हैं।



