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बाबा रामदेव पर नेपाली मिडिया का आरोप : मुरली मनोहर तिवारी

 

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मुरलीमनोहर तिवारी , बीरगंज , ७ जनवरी |कान्तिपुर’ का आरोप है कि नेपाल के कानून अनुसार मुनाफा वितरण नही करने वाली कम्पनी विदेशी नागरिक दर्ता नही करा सकते । जबकि बाबा रामदेव कानून की अनदेखी कर चार भारतीय और एक नेपाली नागरिक के नाम पर कंपनी पंजीकृत कराया, जो की गैरकानूनी है । ‘कान्तिपुर’ का दावा है कि उक्त कम्पनी गैरकानूनी तरीके से दर्ता होने की जानकारी ‘कान्तिपुर’ को २०६९ साल में ही पत्ता लग गया था, फिर अब तक ‘कान्तिपुर’ ने उजागर क्यों नही किया था ?
बाबा रामदेव को जड़ीबुटी खेती तथा आयुर्वेद शिक्षण अस्पताल निमार्ण के लिए नेपाल संस्कृत विश्व विद्यालय ने २ सौ बिघा जमीन ४० वर्ष के लिए किराए में देने की घोषणा की है । विश्वबिद्यालय के उपकुलपति कुलप्रसाद कोइराला तथा उच्च कर्मचारी के अगुवाई में जÞमीन भाड़ा में देने के घोषणा पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी विरोध में आए । ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ ने खबर दिया की, स्थानीय स्तर पर विवाद होने के बाद इसका फाइल प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल को भेजा गया । ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ स्रोत के अनुसार बाबा रामदेव प्रधानमन्त्री को प्रभाव में लेकर निर्णय करा रहे है । क्या ऐसा निर्णय होने से कुछ गलत हुआ ऐसा कहा जा सकता है ?
‘कान्तिपुर’ और ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ के द्वारा लगाए आरोप गंभीर है, इसकी पड़ताल करने के लिए ‘हिमालिनी’ ने बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि के बारे में जानकारी जुटाने और उसे खंगालने का बीड़ा उठाया । बाबा रामदेव, वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव जन्म २६ दिसम्बर १९६५, हरियाणा, भारत हैं । सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव में योग और संस्कृत की शिक्षा ली । योग गुरु बाबा रामदेव ने युवावस्था में ही सन्यास लेने का संकल्प किया और रामकृष्ण, बाबा रामदेव के नये रूप में लोकप्रिय हो गए । बालकृष्ण का जन्म ४ अगस्त १९७२ को हुआ और इन्होंने संस्कृत में आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी–बूटियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त की और इसका प्रचार–प्रसार का कार्य करते हैं । इनके सफर पर एक नजर डालें तो उनके वर्तमान सहयोगी आचार्य बालकृष्ण और आचार्य कर्मवीर के साथ शुरुआत १९९०–९१ में की । उन्हें हरिद्वार के पास कनखल में त्रिपुर योग आश्रम में दवाई बनाने के लिए रखा गया । वही उनकी मुलाकÞात कृपालु बाग आश्रम के महंत स्वामी शंकर देव से हुई । शंकर देव का उस इलाके में काफी सम्मान था और इलाके में उनकी काफी जमीन भी थी । बाद में इन्ही संत के जायदाद का इस्तेमाल कर बाबा रामदेव ने ५ जनवरी १८८५ को दिव्य योग मंदिर नामक ट्रस्ट की स्थापना की ।
ट्रस्ट में महंत के रूप में स्वामी शंकर देव थे जबकि बाबा रामदेव इसके अध्यक्ष बनाए गए । आचार्य बाल कृष्ण को इसमें सचिव और कर्मवीर को उपाधयक्ष बनाया । ट्रस्ट का मूल उद्देश्य योग को आम लोगो तक पहुँचाना था । बाबा रामदेव पर ये आरोप लगते रहे है कि ट्रस्ट के शुरुआती नौ महीनो में ही रामदेव और बालकृष्ण ने अपने खिलाफ जा रहे लोगो को बाहर का रास्ता दिखाने का काम शुरू कर दिया और अंत में बाबा रामदेव ने अपने ही सहयोगी रहे उपाधयक्ष कर्मवीर को निकाल दिया । बाबा ने साथ ही ट्रस्ट के महंत से एक पेपर भी हस्ताक्षर किया था, जिसमे यह कहा गया था की ट्रस्ट में होने वाले किसी भी तरह के विवाद में ट्रस्ट की सारी जायदाद इसी तरह के किसी ट्रस्ट को दे दिया जाये और इसी हस्ताक्षर के बाद रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण उस ट्रस्ट के मालिक बन बैठे । हालाँकि ट्रस्ट के महंत रहे स्वामी शंकर देव साल २००७ के बाद रहस्यमय ढंग से लापता हो गए और उनका कुछ भी अता पता नहीं है । इसके खिलाफ बाबा रामदेव पर एक मुकÞदमा भी दर्ज है, लेकिन बाबा रामदेव के बिरोधी रहे, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के सघन छानबीन के बावजूद कोई आरोप सिद्ध नही हो सका ।
वर्तमान में बाबा रामदेव देश विदेश में योग सिखाने के अलावा पतंजलि के हर्बल उत्पाद भी बनाते है । चरक के बिरासत के वाहक बालकृष्ण ने आयुर्वेद से संबंधित कुछ पुस्तकों की भी रचना की है, उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकेंः– आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य, आयुर्वेद जड़ी–बूटी रहस्य, भोजन कौतुहलम्, आयुर्वेद महोदधि, अजीर्णामृत मंजरी, विचार क्रांति –नेपाली ग्रंथ) । आचार्य बालकृष्ण ने शोध के क्षेत्र में भी अपना अहम योगदान दिया है अपने सह लेखकों के साथ अब तक ४१ शोध पत्र लिख चुके हैं । सभी शोधपत्र योग, आयुर्वेद और दवाइयों से संबन्धित हैं ।
बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के कई संगठन चल रहे है, जिनमे, पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, पतंजलि ग्रामोध्योग ट्रस्ट, पतंजलि आयुर्वेद, हरिद्वार, योग संदेश, पतंजलि बायो अनुसंधान संस्थान, वैदिक ब्रॉड कास्टिंग लिमिटेड, पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क इसके अलावा पतंजलि योगपीठ के स्कूल,अस्पताल भी हैं और हरिद्वार में हजारों एकड़ में फैला पतंजलि का आश्रम है, जो निरन्तर समाज सेवा में कार्यरत रहता है ।

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