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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला: पदोन्नति में आरक्षण कोटे को किया खत्म

 

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*नई दिल्ली.मधुरेश*~देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक एतिहासिक फैसला सुनाया है जिसमें कोर्ट ने पदोन्नति में मिलने वाले आरक्षण कोटे को खत्म कर दिया है। जिसका सबसे बुरा असर कर्नाटक के दस हजार सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा, जहां इस आधार पर उनका डिमोशन किया जाएगा। इस फैसले के बाद से अब उन्हें नौकरी में पदोन्नति के लिए आरक्षण नहीं मिल पाएगा। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी किये गए इस आदेश को चुनौती देने के लिए कांग्रेस मैदान में आ चुकी है। कांग्रेस ने यह चाल आगामी 2018 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चली है।

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कर्नाटक कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा है कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। उन्होंने कहा है कि कोर्ट का यह आदेश पूर्णतः दलित विरोधी है और यदि हम दलितों के साथ खड़े नहीं हुए तो हम पर दलित-विरोधी होने का आरोप लग जाएगा। जिससे आगामी विधानसभा चुनाव खतरे में पड़ सकता है। हांलाकि मामले पर अभी आखिरी फैसला नहीं लिया गया है।

कोर्ट के इस फैसले पर बात करते हुए कर्नाटक राज्य के कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बी पी मंजे गौड़ा ने बताया कि कर्नाटक में कुल 65 डिपार्टमेंट की 18 प्रतिशत पोस्ट SC-ST लोगों के लिए आरक्षित थी। जिसमें कुल 5.15 लाख सरकारी कर्मचारियों में से 1-2 प्रतिशत ही ऐसे कर्मचारी हैं जिन्हें पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिला होगा। इस फैसले के तहत राज्य के लगभग 7,000-10,000 अफसरों और कर्मचारियों को निचली रैंक पर लाया जाएगा। लेकिन एसोशिएशन ने दलित लोगों के लिए खड़े होने से इंकार कर दिया है।

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कानून और संसदीय मामलों के मंत्री टी बी जयचंद्र ने बताया कि सरकार अभी अकाउंटेंट जनरल से बात कर रही है कि इस मामले में क्या किया जा सकता है। यहां बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को फैसला सुनाया था कि 1978 से अभी तक जिन एससी/एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति आरक्षण के आधार पर मिला था उसको खत्म कर दिया गया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कर्मचारियों को डिमोट करने के लिए तीन महीने का वक्त भी दिया था।

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