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नेपाल और भारत किसी ओर से द्विपक्षीय संबंधों के विवादित मुद्दे को नहीं उठाया गया

 

नई दिल्ली ८ अप्रेल

 

चीन के बढ़ते प्रभाव की आशंकाओं को नकारते हुए भारत और नेपाल ने संबंधों को नए मुकाम तक पहुंचाने का फैसला किया है। इसके तहत काठमांडू और दिल्ली सीधे रेल लाइन से जुड़ जाएंगे। इसके साथ दोनों देशों के बीच नदी परिवहन के रास्ते भी खोले जाएंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार विदेश यात्रा आए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत में नोटबंदी और मधेसी जैसे विवादित मुद्दे पूरी तरह गायब थे। यहां तक कि बातचीत में चीन पर चर्चा तक नहीं हुई।

केपी शर्मा ओली के चीन के साथ नजदीकियों को देखते हुए उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत-नेपाल के बीच संबंध बिगड़ने की आशंका जताई जा रही थी। ओली के चीन के ओबोर (वन बेल्ट वन रोड) में शामिल होने की घोषणा से इन आशंकाओं को बल भी मिला था। लेकिन चीन के बजाय भारत की पहली विदेश यात्रा कर ओली ने साफ कर दिया कि उनकी पहली प्राथमिकता नेपाल में स्थायी शांति और आर्थिक विकास है और यह नई दिल्ली के सहयोग के बिना नहीं हो सकता।

 विदेश सचिव विजय गोखले ने भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों के बीच हुए तीन करार को दोनों देशों के बीच संबंधों लिए गेम चेंजर करार दिया। इनमें सबसे अहम रक्सौल और काठमांडू के बीच बिजली की रेललाइन बिछाना है। अगले एक साल के भीतर इसके सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया जाएगा और उसके बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इस रेललाइन के बन जाने के बाद काठमांडू सीधे नई दिल्ली से जुड़े रेलवे नेटवर्क के साथ जुड़ जाएगा।

 गोखले ने जल परिवहन के लिए बनी सहमति को भी ऐतिहासिक करार दिया है। इससे जमीन से घिरे नेपाल को नदियों के मार्फत समुद्र तक पहुंचने का रास्ता मिल सकता है। जाहिर है नेपाल इसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। वहीं भारत ने नेपाल में कृषि के विकास के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। इसके तहत भारत कृषि के विकास में अपने अनुभवों और नई तकनीक को साझा करेगा। इसी क्रम में यात्रा के अंतिम दिन रविवार को प्रधानमंत्री ओली जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय जाकर वहां अत्याधुनिक शोधों का जायजा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में मिट्टी की जांच के अनुभवों को साझा करने का भरोसा दिया है।

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सबसे बड़ी बात यह है कि नेपाल और भारत किसी ओर से द्विपक्षीय संबंधों के विवादित मुद्दे को नहीं उठाया गया। विजय गोखले ने साफ किया कि दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत में चीन का जिक्र तक नहीं आया। जाहिर है ओबोर पर कोई चर्चा नहीं हुई। वहीं नेपाल ने अपने यहां पड़े हुए हजारों करोड़ के रुपये के रद हो गए पुराने भारतीय नोटों का मुद्दा नहीं उठाया। मधेसी के मुद्दे भी बातचीत के बीच से गायब रहे। इसके बजाय दोनों प्रधानमंत्रियों ने आपसी सहयोग से दोनों देशों में विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके तहत दोनों प्रधानमंत्रियों ने मोतीहारी और अमलेखगंज के बीच तेल पाइपलाइन की आधारशिला रखी और बीरगंज में नए इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का उद्घाटन किया।

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