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अाखिर बिहार के गया में ही क्या‌ें हाेता है पिण्डदान

 

२५ सितम्बर

आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 दिनों तक का समय पितृपक्ष का होता है। मान्यता के अनुसार पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का एक सहज और सरल मार्ग है। मनुष्य पर देव ऋण, गुरु ऋण अौर पितृ ऋण होते हैं। माता-पिता की सेवा करके मरणोपरांत पितृपक्ष में पूर्ण श्रद्धा से श्राद्ध करने पर पितृऋण से मुक्ति मिलती है।

ऐसे तो देश के हरिद्वार, गंगासागर, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट, पुष्कर सहित कई स्थानों में भगवान पितरों को श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध से मोक्ष प्रदान कर देते हैं, लेकिन गया में किए गए श्राद्ध की महिमा का गुणगान तो भगवान राम ने भी किया है। कहा जाता है कि भगवान राम और सीताजी ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए गया में ही पिंडदान किया था।

मोक्ष की भूमि व विष्णु की नगरी है गया

गया को विष्णु की नगरी माना जाता है। यह मोक्ष की भूमि कहलाती है। गरुड़ पुराण के अनुसार गया जाने के लिए घर से निकले एक-एक कदम पितरों को स्वर्ग की अोर ले जाने के लिए सीढ़ी बनाते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार गया में पूर्ण श्रद्धा से पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष मिलता है। मान्यता है कि गया में भगवान विष्णु स्वयं पितृ देवता के रूप में उपस्थित रहते हैं, इसलिए इसे पितृ तीर्थ भी कहते हैं।

जानिए गयासुर की कहानी

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मान्यता है कि गया भस्मासुर के वंशज दैत्य गयासुर की देह पर फैला है। कहते हैं कि गयासुर ने ब्रह्माजी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर वरदान मांगा कि उसकी देह देवताअों की भांति पवित्र हो जाए अौर उसके दर्शन से लोगों को पापों से मुक्ति मिल जाए।

वरदान मिलने के पश्चात स्वर्ग में जन्संख्या बढ़ने लगी अौर लोग अधिक पाप करने लगे। इन पापों से मुक्ति के लिए वे गयासुर के दर्शन कर लेते थे। इस समस्या से बचने के लिए देवताअों ने गयासुर से कहा कि उन्हें यज्ञ के लिए पवित्र स्थान दें। गयासुर ने देवताअों को यज्ञ के लिए अपना शरीर दे दिया।

कहा जाता है कि दैत्य गयासुर जब लेटा तो उसका शरीर पांच कोस में फैल गया। यही पांच कोस का स्थान आगे चलकर गया के नाम से जाना गया। गया के मन से लोगों को पाप मुक्त करने की इच्छा कम नहीं हुई, इसलिए उसने देवताअों से फिर वरदान की मांग कि यह स्थान लोगों के लिए पाप मुक्ति वाला बना रहे। जो भी श्रद्धालु यहां श्रद्धा से पिंडदान करते हैं, उनके पितरों को मोक्ष मिलता है।

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साभार दैनिक जागरण

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