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भारत मे राज्य की सहमति बगैर किसी विदेशी को नागरिकता नही दी जाएगी

 

भारत केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि नागरिकता (संशोधन)पारित हो जाने के बाद सम्बद्ध राज्य सरकारों की सहमति के बगैर किसी विदेशी को नागरिकता नही दी जाएगी ।मंत्रालय के प्रवक्ता अशोक प्रसाद ने कहा कि भारतीय नागरिकता के लिये हर आवेदन की जांच सम्बद्ध उपायुक्त या जिलाधिकारी करेंगे और अपनी रिपोर्ट सम्बद्ध राज्य सरकार को सौपेंगे ।तभी किसी विदेशी नागरिक को नागरिकता दी जाएगी ।उल्लेखनीय है कि नागरिकता अधिनियम 2019 का सख्त विरोध किया गया था ।दरअसल यह अधिनियम 31 दिसंबर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आये बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आये हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, इसाई अल्पसंख्यकों  के लिए है जिन्हें कम से कम भारत मे 7 साल रहना होगा जिसकी अवधि पहले 12 साल थी । ध्यातव्य हो कि यह नियम नेपाल से आये नागरिकों के लिए नही है ।

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