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आज दिल करता है प्यार का एक कतरा तुमसे लेकर, असंख्य असीमित प्यार दूँ : बसंत

 

एक चाहत खुद के नाम

 

अपने जन्मदिन पर

आज के दिन लगता है

ख़ुद को,

असंख्य असीमित प्यार दूँ

अपनी हर ख़ुशियाँ,

और ये जीवन

ख़ुद ही पर वार दूँ !

मेरी दुनिया आज

ख़ुशहाली का एक

गुलिस्ताँ है

क्यों न उसमें से

कुछ फूल चुनकर

अपनों में बाँट दूँ !

असंख्य असीमित प्यार दूँ

सोचता हूँ अक्सर

कहाँ से आया

कहाँ जाने वाला हूँ

दर्द से पनपा,

वजूद है मेरा

या फिर,

नाकामी से उभरा

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कोई सरफिरा हूँ ।

नहीं ! आज इस

जद्दोजहज को

यूँ ही छोड़ कर

जहाँ दिलकशी हो,

और हो दर्द थोड़ा

प्यार के उस

अफसाने की ओर

इस जिन्दगी को मोड़ दूँ

असंख्य असीमित प्यार दूँ ।

आज दिल करता है

प्यार का बस एक

कतरा तुमसे लेकर,

तुम पर ही अपनी

सारी दुनिया हार कर

अपनी मुहब्बत के,

इस गुलिस्ताँ से

कलियाँ प्यार की चुनकर

तुमको प्यार से सँवार दूँ

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आज अपने जन्मदिन पर

असंख्य असीमित प्यार दूँ !!

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