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रक्सौल से काठमांडू के बीच चलेगी रेलगाड़ी, जून तक तैयार हो जाएगा डीपीआर

 

रिपोर्ट – मधुरेश प्रियदर्शी_नई दिल्ली/मोतिहारी – भारत-नेपाल के बीच सदियों से मजबूत रिश्ते को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार ने अपनी ओर से पहल तेज कर दी है। और ज्यादा मजबूत करेगी। अब बिहार के पूर्वी चंपारण जिला अन्तर्गत सीमाई शहर रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू तक रेल लाइन के निर्माण कार्य को मूर्त रुप देने का काम प्रगति पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणा को जमीन पर उतारने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से कार्यों में तेजी लाई गई है। भारतीय शहर रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू तक सीधी रेल सेवा शुरू करने की दिशा में काम तेजी से चल रहा है। रक्सौल से काठमांडू तक की कुल 136 किलोमीटर की दूरी में 13 प्रमुख स्टेशन बनेंगे।

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प्रस्तावित रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग पर रेल लाइन बिछाने के लिए सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है। इस वर्ष जून तक विस्तृत योजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार हो जाएगा। प्रस्तावित रेलमार्ग में पहाड़ खोदकर सुरंग भी बनाई जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के प्रथम सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। 136 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर 32 रेलवे ओवरब्रिज व 53 अंडरपास, 41 बड़े पुल एवं 259 छोटे पुल बनाए जायेंगे। जिससे सड़क यातायात को सुचारू ढंग से बहाल रखा जा सकेगा।

पूर्व मध्य रेल के डिप्टी चीफ इंजीनियर उत्कर्ष कुमार ने बताया कि पहला सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। पिछले सप्ताह ही प्रतिवेदन रेल मंत्रालय को सौंप दिया गया है। अब विस्तृत सर्वे का कार्य होने जा रहा है, जिसमें स्टेशनों कि संख्या, पुल- पुलिया, अंडरपास, ओवरब्रिज आदि को जरूरत के अनुसार घटाया-बढ़ाया भी जा सकता है। उन्होंने बताया कि कहां-कहां रेल यार्ड की जरूरत पड़ेगी यह भी देखा जाएगा। सर्वेक्षण के अनुसार रक्सौल, बीरगंज, बगही, पिपरा, धुमडवना, ककाड़ी, निजगढ़, चंद्रपुर, धिवाला, शिखरपुर सिनेरी, साथीखेल और काठमांडू जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर रेलवे स्टेशन बनेंगे। रेलमार्ग से जोड़ने के लिए रक्सौल से काठमांडू तक के बीच का यह रेलखंड 130 किलोमीटर लंबी होगी।

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यहां बता दें कि रेलवे की इस महत्वकांक्षी परियोजना के लिए भारत और नेपाल के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में 31 अगस्त 2018 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था।

दोनों देशों के बीच सदियों से मित्रवत संबंध हैं। अब सीधी रेल सेवा से जुड़ने से सांस्कृतिक, राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे। पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि रेलवे की यह महत्वाकांक्षी परियोजना है। दोनों देशों के बीच साल 2018 में ही समझौता हो चुका है। रेल लाइन के निर्माण पर लगभग 16550 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है। काम को गति दी जा रही है भारत और नेपाल सरकार के सभी संबंधित विभाग के अधिकारी इस कार्य में दिन-रात जुटे हुए हैं।

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भारत और नेपाल के बीच रेल सेवा की शुरुआत होने से दोनों देशों के रिश्ते में और अधिक मजबूती आएगी। सदियों से भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का संबंध रहा है जिसे रेल परियोजना के माध्यम से पीएम मोदी और भारत की सरकार और अधिक मजबूती प्रदान करने जा रही है।

फाइल फोटो

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