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राष्ट्रपति मैथिली बोलने मे कठिनाई महशुस करते हैं ।

 

१७ पुस, काठमाडू । राष्ट्रपति डा. रामवरण ने कहा है कि उनकी भाषा खिचडी जैसे बन गयी है । मातृभाषा मैथिली और सम्पर्क भाषा नेपाली होने के कारण राष्ट्रपति यादवको कहतें हैं ’मै घर मे प्रायः मैथिली बोलता हूँ, बंगाली से मिलने पर बंगाली बोलता हूँ, विदेशी से मिलने पर अंग्रेजी मे बोलता हूँ । घर से बाहर नेपाली बोलता हूँ । इसलिये मेरी भाषा खिचडी जैसे बन गयी है । मैथिली बोलने पर शुद्ध मैथिली नही बोलने का डर रहता है।’

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भारत भ्रमण के समय पुस १३ गते शुक्रबार को दिल्ली मे आयोजित अन्तरराष्ट्रिय मैथिली नाट्य महोत्सव मे भाषण करते हुये डा. यादव ने अपनी भाषा खिचडी जैसे होने की बात बताया । कुछ मैथिली और ज्यादा नेपाली मे बोलते हुये राष्ट्रपति महोदय ने वीच-वीच मे अंग्रेजी भी मिसावट करके अपनी बात रखी थी। ऐसा लग राहा था कि हिन्दी बोलने मे उनको डर लग रहा है ।

राष्ट्रपति यादव को दिल्ली मे मैथिली भाषा का नाटक देखाने के लिये जनकपुर से २१ कलाकारों की टोली भुखे-प्यासे रेल मेर्ग से दिल्ली पहुँची थी । राष्ट्रपति यादव ने कार्यक्रम मे कहा कि ‘जनकपुर का नाटक है उधर ही देखुँगा ।

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प्रष्ट वक्ता के रुप मे माने जानेवाले यादव ने बताया कि वे खासकर के बनारस मे आये थे लेकिन, राष्ट्रप्रमुख होने के कारण उन्हे दिल्ली आना परा है और नेताओं के साथ भेंट घाट किया है । राष्ट्रपति ने नेपाल-भारत के वीच के सम्बन्धों की चर्चा करते हुये कहा कि गंगा मे पानी का बरा अंश नेपालीयों का भी है । उसीप्रकार गौतम बुद्ध ने नेपाल मे जन्म लेकर भारत के गया मे ज्ञान प्राप्त किया और जनकपुर मे जन्मी सीता का विवाह भारत के राम के साथ हुआ ।

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कार्यक्रम मे दिल्ली स्थित नेपाली दुताबास के कर्मचारी भी सहभागी हुये थे । यद्दपि राष्ट्रपति यादव ने नेपाली टोली का नाटक नहेी देखा तव भी महोत्सव मे मञ्चित ७ नाटक मे से नेपाली टोली का नाटक की प्रशंसा की गयी ।

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