कोरोना महामारी के कारण नेपाल अभूतपूर्व संकट में : डॉ.विजय कुमार सिंह
जनकपुरधाम | कोरोना महामारी के कारण नेपाल भी अभूतपूर्व संकट मे है। शुरुआती लापरवाही का खामियाजा तो हमें भुगतना पर ही रहा है। पर हम अभी भी सचेत , संवेदनशील अैार गम्भीर नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस भयंकर महामारी विरुद्ध की लडाई के लिए एक राष्ट्रिय प्रोटोकल अैार निर्देशिका जारी की है । कृपया इसे गम्भीरता से लें। इसके लिए सरकार एवं सम्बन्धित निकायों को कठोर अैार प्रतिबद्ध होना ही होगा।
सार्वजनिक अैार विभिन्न पदो पर आसीन व्यक्तियों के आचार व्यवहार आम लोगों मे गलत सन्देश प्रवाहित कर सकते हैं। कोरोना के विरुद्ध का मास्क, कपडा वाला मास्क नहीं है , केवल N95 मास्क ही प्रभावकारी है, वो भी disposable है, जिसके एक पीस को ही आप बार बार प्रयोग मे नही ला सकते । बिडम्बना यह है की आज यह करीब करीब अनुपलब्ध ही है अैार मँहगा भी है। अनुपलब्धता कि स्थिति मे स्वास्थ्यकर्मी सर्जिकल मास्क का दोहरा तिहरा लेयर बना कर प्रयोग मे ला रहें हैं। पर यह सर्जिकल मास्क भी हम उन्हें उपलब्ध नहीं करा पा रहेें है।
अत: प्रभावकारी मास्क की आवश्यकता सबसे पहले अैर सबसे अधिक किसे है ?
* स्वाभाविक रुप से उनलोगों को जो इस महा अभियान के सबसे आगे के मोर्चा पर हैं यानि…. स्वास्थ्यकर्मी अैार इस समूह मे भी प्रोटोकल की अत्यन्त आवश्यकता है।
* जो कोरोना संक्रमित है याा शंकास्पद है ताकि उनसे अन्य लोगों मे बिमारी न फैले।
* जो क्वारेन्टाइन मे है अैार वे लोग जो इन लोगों कि हेरचाह मे लगे हुए हैं
* स्वास्थ्य संस्था मे कार्यरत सहयोगियों अैार एम्बुलेन्स टीम के कर्मियों आदि को
आम समुदाय के लिए लाक डाउन अैार पारस्परिक भैातिक दूरी बनाए रखना सबसे महत्त्वपूर्ण है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए कपडा का मास्क वितरण दण्डनीय अपराध जैसा ही है क्योंकी इससे लोगों मे झूठी सुरक्षा कि अनुभूति होती है अैार आवश्यक अन्य सावधानियों के प्रति लोग लापरवाह हो जा सकते हैं खासकर social distancing के प्रति जो कम से कम १ मीटर तो होनी ही चाहिए।

