नौ दीये –नौ बजे ( भारतीय सन्दर्भ में ) : लक्ष्मण नेवटिया
नौ दीये –नौ बजे
( भारतीय सन्दर्भ में )
जलाएँ पहला दीया,
कोरोना के विरुद्ध एकजुटता का।
जलाएँ दूसरा दीया,
देशकी पूर्ण अखंडता का।
जलाएँ तीसरा दीया ,
अनेकता में एकता का ।
जलाएँ चौथा दीया,
जनता की धीरता गम्भीरता का।
जलाएँ पाँचवा दीया,
नर्स चिकित्सकों की दृढताका।
जलाएँ छठा दीया,
दानवीरों की उदारता का ।
जलाएँ सातवाँ दीया,
पुलिसकर्मियों की सतर्कता का।
जलाएँ आठवाँ दीया,
सफाईकर्मियों की प्रतिबद्धताका।
जलाएँ नौवाँ दिया,
उस महानायक के प्रति कृतज्ञता का।
हाँ पर इन सभी नौ दीयों को
जलाए रखना है तो
तुरन्त रोकना होगा उस तूफान को
जो घुमड़ रहा है हमारे दिलों में
आक्रोशका- घोर नफरतका।
क्योंकि प्रदीप्त प्रेम शीतल अनल है
घृणा की एक चिंगारी घोर दावानल है।
निर्णय तुम्हारा है करो बस होश में
कदम कोई एक भी
गलत न उठ जाए जोश-जोश में।
समझो मेरे प्रिय! वक्त की नजाकत को,
सबसे पहले रोकलो घर की चौखट पर आ खड़ी
“चाइना मेड”
कोरोना आफत को।
— लक्ष्मण नेवटिया

