आखिर क्यों जलाई गई विन्दु ठाकुर
दसवीं कक्षा में पढते हुए १८ वषर्ीया विन्दु ठाकुर ने ना जाने क्या क्या सपने अपने जीवन के बारे में सजाए होंगे। आने वाली जिन्दगी को खूबसूरत रंगों से भरने के लिए क्या क्या न सोची होगी। उम्र की जिस दहलीज पर विन्दु थी, उस उम्र में किसी के प्रति आकर्षा भी स्वाभाविक ही था। लेकिन क्या महज इसलिए उसकी हत्या कर देना या उसे जिन्दा जला देना ठीक है – वह भी अपने ही पिता के द्वारा –

शायद आप सोच भी नहीं सकते। हम में से अधिकांश लोग शायद यह कभी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि एक बाप अपनी बेटी को सिर्फइसलिए जिन्दा जला देता है क्योंकि उससे किसी लडÞके से प्यार हो गया था। बर्दिया में शिवा हासमी को जिन्दा जलाकर उसकी हत्या की गई। उसके घर के लोगों पर अभी सिर्फशक ही जताया जा रहा था। लेकिन बारा जिले के प्रस्टोका में विन्दु ठाकुर को जिन्दा जला देने के पीछे उसके ही पिता का हाथ होने की बात पुलिस को भी यकीन नहीं आ रही थी।
पौष ११ गते सुबह-सुबह प्रस्टोका में एक युवती की जली हर्ुइ लाश बरामद हर्ुइ। पता लगा कि वह इसी गांव की रामा ठाकुर की बेटी है जो कि यहीं पर कक्षा १० में पढÞती है। विन्दु ठाकुर का जला हुआ शव जहां बरामद किया गया, वह जगह उसके घर से करीब ५०-६० मीटर की दूरी पर ही है। पुलिस को लाश की शिनाख्त करने में कोई परेशानी नहीं हर्ुइ। विन्दु के पिता ने ही शव को पहचान लिया। उन्होंने बताया कि उसकी बेटी सुबह ट्यूशन पढÞने के लिए गई थी। उसकी मां ने बताया कि सुबह-सुबह वह शौच के लिए घर के बाहर गई थी। वहां से लौट कर आई और फिर कपडÞे पहन कर स्कूल के लिए चली गई। विन्दु के माता पिता ने बताया कि उनका गांव में किसी के साथ भी कोई मतभेद नहीं है। पुलिस को कुछ दिनों तक समझ में ही नहीं आया कि आखिर माजरा क्या है। फिर पुलिस ने जिस जगह पर शव बरामद हुआ वहां आसपास के इलाके की गहर्राई से जांच की। पुलिस को सुराग के रुप में एक टार्ँच मिला। बाद में मालूम चला कि यह वही टार्ँच है जो कि मृतक विन्दु के पिता रामा ठाकुर अक्सर प्रयोग करते थे।
अब पुलिस की शक की र्सर्ूइ उसके परिवार वालों पर ही जाकर टिकी। अचानक एक दिन पुलिस रामा ठाकुर के घर पर पहुंची और उनके पूरे घर की तलाशी ली। माजरा समझते देर नहीं लगी। विन्दु के चप्पल, उस की शाँल, उस के जले कपडे के कुछ टुकडे और मिट्टीतेल का कनस्तर सबकुछ उसके घर में मिल गया। पुलिस ने बिना देरी किए विन्दु के पिता को नियंत्रण में ले लिया और उससे कर्डाई के साथ पूछताछ की। और रामा ठाकुर ने जो सच पुलिस को बताया वह वाकई हैरान कर देने वाला था। उसके पिता ने बताया कि विन्दु की हत्या सिर्फइसलिए कर दी गई क्योंकि उसका चक्कर उसी गांव के एक लडके के साथ चल रहा था। गांव वालों के सामने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए ही रामा ठाकुर ने विन्दु की हत्या कर दी। उसके पडÞोसी ने पुलिस को बताया कि वारदात के कुछ दिन पहले से ही विन्दु को घर से बाहर निकलते नहीं देखा गया। घर वालों ने उसका बाहर निकलना और स्कूल जाना बन्द करवा दिया था।
पुलिस अब इस तफ्तीश में जुटी है कि विन्दु की पहले हत्या कर उसे जलाया गया या फिर उसे जिन्दा ही जलाया गया। लेकिन जो भी हो घटना उसी के घर की चारदिवारी के अन्दर ही हर्ुइ है। विन्दु का पोष्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डाँक्टरों का कहना है कि उसकी जलने से ही मौत हर्ुइ है। यदि यह सही है तो कल्पना कीजिए उसे जिन्दा जलाते समय किस तरह के दर्द का सामना करना पडÞा होगा। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि जब उसे जिन्दा जलाया गया तो उसके चिखने-चिल्लाने की आवाज क्यों नहीं आई – क्या उसके मुंह और हाथ पैर बांधकर जिन्दा जलाया गया – या फिर उसकी पहले किसी तरह हत्या कर बाद में उसे जलाया गया –
जांच में जुटी पुलिस ने बताया कि पोष्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ साफ नहीं होने से मामला उलझ गया है। लेकिन यह तो तय है कि हत्या उसके घर वालों ने ही की है। यह सामने आया कि लाश को ठिकाने लगाने और उसकी पहचान मिटाने की भी नाकाम कोशिश की गई। पहले तो विन्दु को जलाने के बाद उसके शव को छुपाने के लिए गढ्ढे भी बनाए गए ताकि उसकी लाश को दफना दिया जाए। लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। फिलहाल पुलिस ने रामा ठाकुर को १५ दिनों के पुलिस रिमाण्ड पर रखा है। और यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस हत्याकाण्ड में और कौन कौन शामिल है ! िि
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