काेराेना टेस्ट निगेटिव आने पर भी सतर्क रहने की जरूरत
न्यूयॉर्क, आइएएनएस।
भारतवंशी समेत शोधकर्ताओं के एक दल ने कोरोना वायरस टेस्ट के नतीजों को लेकर आगाह किया है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर टेस्ट हो रहे हैं। कई बार ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि पहले टेस्ट निगेटिव और फिर पॉजिटिव आ जा रहे हैं। इस स्थिति में स्वास्थ्य अधिकारियों को टेस्ट निगेटिव आने पर भी सतर्क रहने की जरूरत है।
मायो क्लीनिक प्रोसिडिंग्स जर्नल में छपे अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस (कोविड-19) की जांच के नतीजों पर अतिविश्वास के खतरे को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। जांच की तकनीक रिवर्स ट्रांसक्क्रिप्टेज पॉलीमेरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) टेस्टिंग की संवेदनशीलता अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अमेरिका के मायो क्लीनिक की शोधकर्ता प्रिया संपतकुमार ने कहा, ‘निगेटिव टेस्ट नतीजा आने की स्थिति में स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े लोग संक्रमण की कम उम्मीद करते हैं।
टेस्ट पॉजिटिव आने पर आरटी पीसीआर टेस्टिंग की उपयोगिता बढ़ जाती है जबकि कोविड-19 को खारिज करने की सूरत में इस जांच की उपयोगिता कम है। शोधकर्ताओं का कहना है कि आमतौर पर निगेटिव टेस्ट का मतलब यह नहीं होता कि किसी व्यक्ति को बेफिक्र हो जाना चाहिए या उसके संक्रमित होने का खतरा नहीं है। किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले रोगी में दिखने वाले लक्षणों के संदर्भ में जांच नतीजों पर ज्यादा गौर करने की जरूरत है।
गौरतलब है कि कोरोना के कहर से दुनिया को निजात मिलती नजर नहीं आ रही। इटली में एक दिन में 566 लोगों की मौत हुई है जिसके साथ ही मृतकों का आंकड़ा 20 हजार को पार कर गया है। अमेरिका के बाद यह सबसे बड़ी संख्या है। ब्रिटेन और खासकर इंग्लैंड में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। एक दिन में 717 मौतों में से अकेले इंग्लैंड में ही 667 मौतें हुई हैं। ब्रिटेन में मरने वालों की संख्या 11,329 हो गई है 4,342 नए मामलों के साथ संक्रमितों की संख्या भी बढ़कर 88,621 पर पहुंच गई है। 90 फीसद मामले सिर्फ इंग्लैंड में सामने आए हैं। इंग्लैंड में 10,261 लोगों की जान गई है।

