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नेपाल सरकार के अनुमति के इंतजार में, बीरगंज का कोवीड अस्पताल-मुकेश द्विवेदी

 

बीरगंज, २०७७ बैशाख १३ गते शनिवार । बिरगंज महानगरपालिका का गण्डक अस्पताल के साथ कोरोना अस्पताल के लिए सम्झौता किए हुए, लगभग एक सप्ताह हुआ लेकिन अभी तक अस्पताल सन्चालन नही हुआ। शुरू-शुरू में कोवीड अस्पताल को लेकर बिरगंज में राजनीतिक और समाजिक दोनो क्षेत्र में ब्यापक चर्चा परिचर्चा हुआ। बहुतों ने राजनीतिक भी किया।

शुरु में बिरगंज में अलग कोवीड अस्पताल होने के लिए चारों तरफ से माग उठने लगा, मांग जायज भी था, क्योंकि नेपाल के प्रवेश द्वार और नेपाल के आर्थिक राजधानी बीरगंज होने के कारण, दैनिक हजारौं-हजार लोग के आने-जाने के कारण बिरगंज में कोवीड अस्पताल होना चाहिए था लेकिन केन्द्र सरकार के लिस्ट में बिरगंज का नाम नही आया, तब प्रदेश सरकार ने शुरू में अस्पताल किराया में लेकर कोवीड अस्पताल बनाने को बोला, जिसमें  देखावटी रूप में प्रदेश से टोलि आया लेकिन प्रदेश के लिस्ट में भी बिरगंज का नाम नही आया।

 

उसी समय बिरगंज के छपकैया में तिन जमाती में करोना पोजेटिभ पाया गया जिससे चारों तरफ़ भय और त्राश का स्थिति सृजना हुआ। जब चारों तरफ़ से प्रदेश सरकार का आलोचना होने लगा, तब आनन-फानन में देखावट के लिए एक पीसीआर (PCR) मसीन लाया गया, जो दस दिन बाद भी संचालन में नहीं आया।

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इस तरह चारों तरफ से कोभिद अस्पताल का मांग होने पर बिरगंज के मेयर बिजय सरावगी ने बीरगंज प्रति केन्द्र और प्रदेश सरकार का रवौया देख कर खुद आगे बढ़ कर विभिन्न प्राईभेट अस्पताल से किराया में लेकर अस्पताल चलाने का प्रयास किया। शुरुआत में अस्पताल मालिको ने अस्पताल देने का गप्प समाजिक संजाल में दिया, खुब ढिढाेरा पीटा, जब समय आया तो उनका अत्ता-पत्ता भी नही मिला। उसी समय नेकपा के नगरकमिटी अध्यक्ष तथा गण्डक अस्पताल के संचालक रहबर अन्सारी ने अपना अस्पताल निशुल्क देने का घोषणा समाजिक सन्जाल में दिया। इधर केन्द्र सरकार ने तिन करोना पोजेटिभ मिलने के बाद नारायणी अस्पताल को करोना अस्पताल घोषणा कर दिया।

केन्द्र सरकार द्वारा नारायणी अस्पताल को कोरोना अस्पताल घोषणा होने के बाद बुद्धिजीवी और सर्बसाधारण द्वारा इसका बिरोध होने लगा। इधर महानगरपालिका भी बिरगंज बासी के माँग प्रति गम्भीर होकर अस्पताल देने वालो को सम्बोधन करते हुए कोभिद अस्पताल के लिए सूचना जारी किया। इस सूचना से बहुतों में बेचैनी उत्पन्न हो गया। “महानगर द्वारा गलती हो रहा है, अत्यधिक पैसे का लेनदेन होने वाला है। मेयर के प्रेस सल्लाहकार गोविन्द देवकोटा सारी बातें मिलाने चितवन से आए है” जैसे भ्रामक समाचार चलाया गया। “नारायणी अस्पताल में ही कोवीड अस्पताल चलाना चाहिए” के नारा से पुरा समाजिक संजाल और ऑनलाइन मिडिया में प्रचार प्रसार किया गया।

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मेयर के ऊपर झूठा आरोप लगाकर चरित्र हत्या की कोशिश की गई। मेयर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि बिरगंज बासी के लिए ऐसे फटहा लोगो की बातों में नही आकर आगे बढ़ा जाए। सूचना जारी होने के तिन दिन भीतर अन्य किसी का प्रस्ताव नही आने पड़, मात्र गण्डक अस्पताल के निवेदन आने पड़, महानगर ने गण्डक अस्पताल के साथ निशुल्क रूप में अस्पताल संचालन के लिए सम्झौता किया, लेकिन वो भी कुछ लोगो को हजम नहीं हुआ। कैसे पचास शैया का संचालन होगा ? ये सम्झौता कार्यान्वयन नही हो इसके लिए कुछ लोग लगे हुए है। ऐसे लोग लाश के ऊपर भी राजनीति करने से बाज़ नही आते।

 

मेयर साहब ऐसे फटहा लोगो के बातों पर ध्यान नही देकर आगे बढ़े और नारायणी अस्पताल के मेसु के नेतृत्व मे कमिटी बनाए। उक्त कमिटी ने एकदम बढ़िया तरीका से पचास शैया का कोभिद अस्पताल चला सकते है का रिपोर्ट दिया और अब अस्पताल चलाने के लिए नेपाल सरकार से अनुमति लेने के लिए पत्र भेजा गया है। पत्र भेज हुए पाच दिन होने के बाद भी अभी तक सरकार ने अनुमती नही दिया है। नेपाल सरकार के अनुमती नही देने के कारण कोभिद अस्पताल संचालन में नही आया है।

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मेयर साहब के अनुसार “नेपाल सरकार द्वारा अनुमति पत्र नही देने के कारण कोवीड अस्पताल संचालन नही हो सका है। सरकार ने करोना का ईलाज निशुल्क घोषणा किया है इसलिए सरकार से अनुमति लेना आवश्यक है। चार जिल्ला के मरीज उपचार के लिए नारायणी अस्पताल में आते है, इलाज का सभी सेवा बन्द कर दिया गया है, इससे बिरगंज के प्राइभेट अस्पताल के लिए कमाने का मौका हो गया है। आज गरीब लोगों को बाध्य होकर प्राइभेट अस्पताल में जाना पड़ रहा है। सभी जगह से मांग हो रही है कि नारायणी अस्पताल से करोना के मरीज को अन्यत्र भेजकर नारायणी अस्पताल संचालन किया जाए लेकिन कुछ लोग चाहते है की गण्डक अस्पताल में करोना अस्पताल नही चले औऱ  प्राइभेट अस्पताल को कमाई हो सकें”।

 

इसी कारण बिरगंज बासी के हैसियत से, सभी राजनीतिक दल से मेरा अनुरोध है कि आपलोग नेपाल सरकार से गण्डक अस्पताल को  कोभिद अस्पताल संचालन करने की अनुमति जल्द से जल्द दिलाने का प्रयास कर दीजिए। आपके प्रयास से गरीबों के उपचार का एकमात्र आशा का केन्द्र नारायणी अस्पताल का संचालन हो सके।

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