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अक्षय तृतीया मुहूर्त 26 अप्रैल 2020 को परशुराम जयंती के साथ मनाया जाएगा : आचार्य राधाकान्त शास्त्री

 

अक्षय तृतीया मुहूर्त :-
वैशाख शुक्ल तृतीया रविवार दिनांक 26 अप्रैल 2020 को परशुराम जयंती के साथ मनाया जाएगा : आचार्य राधाकान्त शास्त्री

पूजा मुहूर्त :–
26 अप्रैल रविवार को प्रातः 05:48 से 11:19 तक शुभ होगा।
अक्षय तृतीया का मुहूर्त-
25 अप्रैल 2020 को दिन में 10 बजकर 19 मिनट से प्रारम्भ होकर तृतीया तिथि समापन 26 अप्रैल को 11:14 मिनट पर होगा ।
अक्षय तृतीया के दिन सुबह शीघ्र उठकर नित्य कर्मों से निवृत हो कर घर पर ही गंगाजल से स्नान कर तांबे के बर्तन में गंगाजल या शुद्ध जल लेकर भगवान सूर्य को पूर्व की ओर मुख करके चढ़ाएं तथा इन 3 में से किसी 1 मंत्र का जप करें-

ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि, तन्नो सूर्य: प्रचोदयात् ।।

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्र किरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा ।।

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशे जगत्पते ।
अनुकम्पय मां भक्तया, ग्रहाणार्घ्यं दिवाकर: ।।

अक्षय तृतीया के बाद प्रत्येक दिन सात बार इस प्रक्रिया को दोहराएं। आप देखेंगे कि आश्चर्यजनक रूप से आपका भाग्य चमक उठेगा। यदि यह उपाय सूर्योदय के एक घंटे के भीतर किया जाए तो और भी शीघ्र फल देता है ।
तृतीया को अखा तीज भी कहा जाता है। अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है और शुभ मुहूर्त में सोना खरीदा जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से धन संपदा में अक्षय वृद्धि होती है ।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया को ही त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था।
अतः इस दिन – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।
मंत्र का जप भी विशेष रूप से लाभदायक होता है ।
इस दिन से आरम्भ कर 5, 7, या 9 दिनों तक रामायण पाठ , विष्णु सहस्त्र नाम एवं गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ करना विशेष रुप से अति लाभदायक होता है ।
अक्षय तृतीया का पौराणिक इतिहास
अक्षय तृतीया का पौराणिक इतिहास महाभारत काल में मिलता है। जब पाण्डवों को 13 वर्ष का वनवास हुआ था तो एक दुर्वासा ऋषि उनकी कुटिया में पधारे थे। तब द्रौपदी से जो भी बन पड़ा, जितना हुआ, उतना उनका श्रद्धा और प्रेमपूर्वक सत्कार किया, जिससे वे काफी प्रसन्न हुए। दुर्वासा ऋषि ने उस दिन द्रौपदी को एक अक्षय पात्र प्रदान किया।
साथ ही उनसे कहा कि आज अक्षय तृतीया है, अतः आज के दिन धरती पर जो भी श्रीहरि विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना करेगा। उनको चने का सत्तू, गुड़, मौसमी फल, वस्त्र, जल से भरा घड़ा तथा दक्षिणा के साथ श्री हरी विष्णु के निमित्त दान करेगा, उसके घर का भण्डार सदैव भरा रहेगा। उसके धन-धान्य का क्षय नहीं होगा, उसमें अक्षय वृद्धि होगी।

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तृतीया तिथि का मांगलिक कार्यों के लिए विशेष महत्व है। इस तिथि को विवाह करना अच्छा माना जाता है। हालांकि इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण देश भर में लॉकडाउन है। ऐसे में मांगलिक कार्यों एवं खरीदारी से बचें, और अपने घरों में ही इस पर्व को मनाएं।
अक्षय तृतीया के दिन पूजन और दान का विशेष महत्व है इससे धन संपत्ति में अक्षय वृद्धि होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया कोई भी कार्य कभी निष्फल नहीं होता है। यही वजह है कि लोग घरों में वैवाहिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए शुभ होता है।

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शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्‍णु के छठें अवतार भगवान परशुराम का जन्‍म हुआ था। परशुराम महर्षि जमदाग्नि और माता रेनुका देवी के पुत्र थे। यही वजह है किनअक्षय तृतीया के शुभ दिन भगवान विष्‍णु की उपासना के साथ परशुराम जी की भी जयंती मनाने और पूजा करने का विधान बताया गया है।
अक्षय तृतीया का महत्व –
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैशाख शुक्लपक्ष तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त या ‘अक्षय तृतीया’ के रूप में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य शुरू करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन पंचांग तक देखने की कोई आवश्कता नहीं होती है। माना जाता है कि इस दिन गृहस्‍थ लोगों को अपने धन वैभव में अक्षय बढ़ोतरी करने के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्‍सा धार्मिक कार्यों के लिए दान करना चाहिए। ऐसा करने से उनके धन और संपत्ति में कई गुना बढ़ोत्तरी होती है।
अक्षय तृतीया से जुड़ी प्रसिद्ध मान्यताएं-
-अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यता के अनुसार सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया पर ही हुई थी।
– अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम भगवान का जन्म हुआ था।
– अक्षय तृतीया पर मां गंगा का धरती पर आगमन हुआ था।
– अक्षय तृतीया के दिन से वेद व्यास जी ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरंभ किया।
– बदरीनाथ धाम के कपाट भी अक्षय तृतीया के दिन ही खोले जाते हैं।
अक्षय तृतीया के दिन किया गया जप, पूजन और दान अक्षय हो जाता है ।
अक्षय तृतीया एवं परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामना ,
अक्षय तृतीया सबके लिए शुभद सुखद एवं मंगलमय हों, आचार्य राधाकान्त शास्त्री ।

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आचार्य राधाकान्त शास्त्री

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