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लॉकडाउन–पश्चात देश की स्थिति, देश का अर्थतन्त्र कैसा रहेगा ? : अंशु झा

 

अंशु झा, काठमांडू | लगभग ३ करोड़ की आबादी वाला देश नेपाल भी इस वक्त संसार के अन्य देशों की भांति कोरोना वाइरस के संक्रमण से बचने के लिये लड़ रहा है । विश्वव्यापी महामारी के रूप में फैला यह कोरोना वाइरस जिससे सारा संसार प्रभावित हो गया है । उसमें नेपाल भी सम्मिलित है । दुर्भाग्यवश फिलहाल नेपाल राजनीतिक उतार–चढाव से भी जूझ रहा है । जो कि अत्यन्त ही निंदनीय और चिंतनीय भी है । सारा संसार जब कोरोना वाइरस से लड़ने के लिये कोई वैक्सिन बना रहा है कोई अपने देश की जनता को सुरक्षित रखने के लिये सदैव तत्पर है उस समय इस देश में राजनीतिक उथल पुथल मची हुई है । प्रशासन के इस रवैया से जनता अपने आपको असहाय महसूस कर रही है । वैसे भी जनता कोरोना के कारण दुख झेल ही रही है जिसका बयान हम शब्दों में नहीं कर सकते हैं ।
अब प्रश्न उठता है कि कोभिड १९ के बाद देश कैसा होगा ? देश का अर्थतन्त्र कैसा रहेगा ? जनता को और कितने दुखों का सामना करना होगा ? इत्यादि । ऐसे ही बहुत सारे प्रश्न लोगों के मन में ज्वार भाटा मचा रहे हैं । वैसे अभी तो जनता घरों में कैद है फिर भी मनुष्य का स्वभाव है, भविष्य के बारे में सोचना जो कि स्वाभाविक भी है क्योंकि दुख तकलीफ सबसे पहले जनता को ही तबाह करता है । तो हम कह सकते हैं कि इन सारे प्रश्नों का जबाब जगत्विदित ही है । क्योंकि यह सब जानते हैं कि लॉकडाउन के कारण देश को बहुत ही नुकसान हो रहा है । देश संचालन हेतु सर्वप्रथम जनता होना चाहिये, जनता से ही देश का निर्माण होता है तत्पश्चात अर्थ का महत्व होता है । परन्तु लॉकडाउन होने से अर्थतन्त्र प्रभावित हो रहा है ।

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जी हां, अर्थविदों के अनुसार देश का आर्थिक क्रियाकलाप अभी सिर्फ २० प्रतिशत ही हो रहा है ८० प्रतिशत आर्थिक कार्य बन्द है । जिसके कारण देश के अर्थतन्त्र पर प्रत्यक्ष असर दिखाई दे रहा है । सरकार के अभियान अनुसार फाल्गुन से लेकर इस आर्थिक वर्ष अर्थात् ८ महीने के अन्दर ११ सौ २६ अरब रकम संकलन करने का उद्देश्य था परन्तु अभी तक सिर्फ ५ सौ ७१ अरब ही संकलन हो पाया है । प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के कर में कमी हो गई है । आर्थिक क्रियाकलाप नहीं होने के कारण लाखों रोजगार समाप्त हो गए हैं । अब आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर रोजगारी ही समाप्त हो जाय तो जनता पर कितना प्रभाव पड़ेगा । भूखमरी का आर्विभाव होगा । वैसे तो अभी भी लॉकडाउन के कारण मजदूर तथा निम्नवर्गीय परिवार भूखमरी को झेल रहा है फिर भी कुछ दयालु व्यक्ति द्वारा राहत प्याकेज मिल जाने से गरीब परिवार का समय व्यतीत हो रहा हैं । परन्तु इस लॉकडाउन पश्चात की स्थिति कैसी होगी ? विषय चिन्ताजनक है ।
समग्र में हम कह सकते हैं कि लॉकडाउन के बाद देश की स्थिति का अनुमान करने पर बहुत ही भयावह स्थिति दृष्टिगोचर हो रहा है । देश के अनगिनत गरीब लोग भूख से मृत्यु को गले लगाएगा, उसके बाद जो बचेगा वह कुपोषण का शिकार बन जायेगा जो कि देश की ही क्षति है । उसी प्रकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग धन्धा इत्यादि में भी अकल्पनीय क्षति पहुंचने का अनुमान है । अब सरकार को इस लॉकडाउन के कारण भारी चुनौतियों का सामना करना होगा । सरकार को विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करना होगा उसके बाद ही क्षतिपुर्ति का सही कार्य हो सकता है । इस आपदा के बाद सरकार के समक्ष बहुत सारे प्राथमिकता देने वाला कार्य का जन्म होगा । जिसका वहन करना सरकार का दायित्व होगा । पक्ष, विपक्ष, नेता, कार्यकर्ता तथा जनता को भी इस कार्य में सरकार का साथ देना होगा क्योंकि इस क्षति की भरपाई करने में एक दो वर्ष से भी अधिक समय लग सकता है । अतः सभी को एकजुट होकर देश के विकस में अग्रसर होना होगा तभी ही देश सबल हो सकता है ।

अंशु झा

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