प्रधानमन्त्री ओली संकट में, सहयोग मांगते हुए नेता नेपाल से भेटवार्ता
काठमांडू, २७ अप्रील । सत्ताधारी नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के दो शीर्ष नेता (केपीशर्मा ओली और माधवकुमार नेपाल) के बीच भेटवार्ता हुई है । विकसित राजनीतिक घटनाक्रम और ओली सरकार के ऊपर दिखाई पड़े संकट संबंधी विषयो को लेकर यह भेटवार्ता हुई है । विशेषतः राजनीतिक वृत्त में ओली सरकार की विकल्प के संबंध में जो बहस हो रहा है, उसी विषय को लेकर प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने अपने ही पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व प्रधानमन्त्री माधव कुमार नेपाल को भेटवार्ता के लिए आमन्त्रण किया है ।
प्रधानमन्त्री निवास बालुवाटार में सम्पन्न भेटवार्ता में प्रधानमन्त्री ओली ने वर्तमान सरकार को सहयोग प्रदान करने के लिए नेता नेपाल से आग्रह किए हैं । स्मरणीय है, प्रधानमन्त्री ओली की कार्यशैली पर असंतुष्टी जाहिर करते हुए नेकपा के अधिकांश सदस्य प्रधानमन्त्री ओली के विकल्प में दिखाई दिए हैं । उन लोगों का कहना है कि तत्काल सरकार परिवर्तन होना चाहिए । इसके लिए पार्टी स्थायी समिति बैठक आह्वान के लिए प्रधानमन्त्री के ऊपर दबाव पड़ रहा है । ऐसी ही पृष्ठभूमि में नेता नेपाल को बुलाकार प्रधानमन्त्री ओली ने नेपाल से विचार–विमर्श किया है ।
समाचार स्रोत को कहना है कि प्रधानमन्त्री ओली पहले की तुलना में सफ्ट चरित्र में प्रस्तुत हुए हैं । प्रधानमन्त्री ओली के विकल्प में नेकपा के अधिकांश नेताओं ने अलग–अलग मिटिङ भी आयोजन किया है । नेता नेपाल ने भी स्पष्ट रुप में कहा है कि एक व्यक्ति एक पद संबंधी नियम पूर्ण रुपमा पालन होना चाहिए और प्रधानमन्त्री ओली को प्रधानमन्त्री पद या पार्टी अध्यक्ष पद में से एक को छोड़ना होगा । इसके लिए उन्होंने दूसरे अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड समूह के साथ भी राजनीतिक सहमति कायम किया है । लेकिन प्रधानमन्त्री ओली कुछ आश्वासन के साथ नेता नेपाल को प्रचण्ड समूह में जाने से रोकने की प्रयास में है । नेकपा संबंद्ध नेताओं का कहना है कि आज सम्पन्न भेटवार्ता वही प्रयासों में से है ।
कहा जाता है कि इसके लिए प्रधानमन्त्री ओली मन्त्रिमण्डल पुनर्गठन और कुछ मुख्यमन्त्री में हेरफर करने के लिए भी तैयार हैं । प्रधानमन्त्री ओली ने नेता नेपाल को प्रचण्ड समूह से मिलने से रोकने के लिए इसतरह का आश्वासन दिया है । लेकिन इधर प्रचण्ड ने नेता नेपाल को भावी प्रधानमन्त्री का आश्वासन दिया है, जिसके चलते ओली और नेपाल के बीच राजनीतिक सहमति नहीं बन पा रही है । नेकपा निकट एक नेता ने कहा है कि डेढ़ घंटों तक जारी भेटवार्ता नेकपा के भीतर जारी राजनीतिक असंतुष्टि को संबोधन करने के लिए ही केन्द्रीत रहा है ।
स्मरणीय है, सरकार ने गत हफ्ता दो अध्यादेश जारी करने के बाद सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी आन्तरिक संकट में फंस गया है । विशेषतः ओली समूह से बाहर रहे अन्य समूहों को मानना है कि प्रधानमन्त्री ओली के कारण पार्टी को जनता में बदनाम होना पड़ रहा है । नेकपा में विशेषतः ३ समूह क्रियाशील है । उसमें से एक समूह के नेतृत्व प्रधानमन्त्री ओली स्वयम् कर रहे है तो दूसरे समूह का नेतृत्व माधव नेपाल और तीसरे समूह का नेतृत्व प्रचण्ड कर रहे हैं । स्थायी समिति हो या संसदीय दल, तीनों समूह के पास बहुमत नहीं है । पिछली बार प्रचण्ड और नेपाल समूह आपस में करीबी में हैं । अगर यह दो समूह मिल जाएंगे तो सरकार परिवर्तन निश्चित है । इसीलिए उसके रोकने के लिए और नेपाल समूह को अपने पक्ष में लाने के लिए प्रधानमन्त्री ओली क्रियाशील हैं ।

