प्रधानन्यायाधीश रेग्मी प्रधानमन्त्री के लिए प्रस्तावित
काठमांडू, ७ फरवरी एकीकृत नेकपा माओवादी द्वारा सर्वोच्च अदालत में बहालवाला प्रधानन्यायाधीश खीलराज रेग्मी को भावी प्रधानमन्त्री के लिए प्रस्तावित किया गया है । हैटौडा में जारी पार्टी के सातवें महाधिवेशन के क्रम में पार्टी अध्यक्ष प्रचण्ड द्वारा बिहीबार पेश किया गया इस प्रस्ताव को हॉल में सहभागी सभी माओवादी कार्यकर्ताओं ने ताली बजारकर पारित किया है ।
चार घण्टा लम्बा अपने मन्तव्य के क्रम में एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड ने मौखिक रुप में रेग्मी का नाम स्वतन्त्र व्यक्ति के तरफ से भावी प्रधानमन्त्री के लिए पेश किया गया था । कांग्रेस–एमाले लगायत प्रतिपक्षी दल सरकार के विरुद्ध सडक आन्दोलन में है, ऐसी अवस्था में माओवादी के तरफ से बहालवाला प्रधानन्यायाधीश रेग्मी का नाम भावी प्रधानमन्त्री के रुप में आना अर्थपूर्ण रुप में लिया गया है ।
कुछ आलोचक ने ता कहा है कि यह प्रस्ताव प्रतिपक्षी दल के लिए ‘लालीपॉप’ के सिवाय और कुछ नहीं है । और कुछ लोगों ने कहा है– यह प्रस्ताव ने तो प्रधानन्यायाधीश को विवाद में ले जाएगा । जब माओवादी ने रेग्मी का नाम भावी प्रधानमन्त्री के रुप में पेश किया गया, उसके कुछ देर के बाद से ही इस के बारे में फेशबुक वाल में प्रतिक्रिया दिखने को मिला रहा है । ऐसी ही क्रम में नेपाल समाचारपत्र के पत्रकार लेखनाथ अधिकारी ने अपने फेशबुक पेज में लिखा है– एमाओवादी ने कहने पर प्रधानन्यायाधीश रेग्मी प्रधानमन्त्री नहीं हो सकते । अन्य दल भी इस में सहमत होना पडेगा । अधिकारी आगे कहते है कि एमाओवादी के महत्वकांक्षा के कारण वह (रेग्मी) अब विवाद में फँस गए । इसी तरह ऑनलाइन खबर के सम्पादक अरुण बराल ने अपने फेशबुक पेज पर लिखा है– व्यवस्थापिका संसद के ऊपर हस्तक्षेप करके संविधानसभा को ही भंग करानेवाले रेग्मी को प्रधानमन्त्री के रुप में प्रस्ताव करना कैसा न्याय है ? शायद अपने ही (रेग्मी) द्वारा सिर्जित समस्या समाधान करने का जिम्मेदारी उनके ही कंधे पर आनेवाल है ।

