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कोरोना कहर और जुल्म झेलती मधेशी जनता : अब्दुल खान

 

अब्दुल खान, नेपालगन्ज । नेपाल में भी दूसरे देशाें की तरह दिन प्रति दिन काेभिड- १९ से जुझते हुए लाेगाे के आँकंडे बढ रहे हैं। काेराेना भाईरस के कारण नेपाल,मधेश में जितने लाेग परेशान नहीं हैं,उससे कहीं कई गुणा लाेग जारी लकडाउन की वजह से प्रभावित हैं।लाेग भूख की वजह से दम ताेड रहे हैं, बेराेजगारी हद से ज्यादा हाे गई जिस कारण आत्महत्या की घटना बढ गई है ।
नेपाल मे काेराेना भाईरसकाे लेकर नेपाली पहाडी ओर मधेशियाें के बीच एक प्रकारका नश्लिए  आन्दोलन चल रहा है।पहाडी लाेगाे के ईलाकाे मे मधेशी दिखने पर आज उनकाे तमाम प्रकार कि रगं भेदी और नश्लभेदी गालियां दी जाती हैं उस पे भी अगर जुबान से हिन्दी भाषा मुँह से निकलते ही भारतीय जासूस की संज्ञा दी जाती है, देश द्राेही ठहराया जाता है,सामाजिक संजाल पर टिकटक भिडियाे मार्फत आत्माकाे ठेस पहुचाने वाली गालियां नेपाली पहाडी द्वारा मधेशयाें काे दी जाती है।
नेपाल मे आजकल का माहाेल बहुत ही संगीन हाे गया है, बच्चा बच्चा में भारत विराेधी बातें भर दी जाती हैं, गाँव, टाेल हाे, नगर हाे, कर्मचारी हाे, साधारण जनता हाे या राजनीतिक कर्मी सब की जुबानपर काला पानी लिपु लेक, टि भी च्यानल हाे या अखबार सभी जगह उसी के सम्बन्ध वाले खबरें सुनाई जाती है, जिस कारण दुकानाे में मधेशियाें काे दैनिक उपभाेग वाले सामान काे खरीदने की दिक्कत, बैंक में पैसा निकालने की मजबुरी, सरकारी कार्यालय मे अपमान, पुलिस प्रशासन की नश्लिय गालियां आदि प्रकार की तकलीफाें का शिकार हाेना पड रहा है, कारण हमारा चेहरा उत्तरी भारतियाें जैसा, बाेली चाली रहनसहन, रितिरिवाज एक हाेने के कारण, वास्तब मे मधेशी लाेग नेपाल मे घर से लेकर संसद भवन तक सुरक्षित नही हैं | कहीं पुलिस हिरासत मे मार दिया जाता है, कहीं राेड पे गाेली मार दी जाती है, कहीं तस्कर कहकर गाेली मारी जाती है, पर मधेशियाें के लिए न्याय नहीं है सिर्फ अपमान है | दाे वर्ष पहिले मधेश स्वतन्त्रता आन्दाेलन से जुडे श्री राम मनाेहर यादव की हत्या पुलिस हिरासत मे हाे गई पर काेई न्याय नहीं, काेई चर्चा नहीं पर वहीं पर एक निर्मला पन्त की हत्या बलत्कार से उसी समय हाेने पर आज भी संसद मे आवाज बुलन्द हाेती है, आज एक दलित गरीब कि मृत्यु पुलिस हिरासत मे हाेती है , एफ आइ आर तक दर्ज नहीं होता  है, कारण नश्लभेद।
मधेशियाें काे दिक्कतै यहां तक है, विदेश में जाे कामकाज, पढाई लिखाई के तहत गए हुवे है उन्हे भी चेहरे और भाषा के आधार पर पहले, पीछे वापस घर लाया जा रहा है, सुविधाऐं दी जाती हैं, आज हफ्तों हाेगए जनमत पार्टी के भातृसंगठन विद्यार्थी जनमतसंघ ने रगंभेद और नश्ल भेद के खिलाफ आन्दोलन कर रहे हैं, कृषी टेलिभिजन जैसे चैनलाें के खिलाफ कार्वाही की माँग की जाती है पर जालिम नश्लभेदी सरकार बहरी बनी बैठी है।

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अब्दुल खानं,
संस्थापक सदस्य जनमत पार्टी

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