Tue. Jul 7th, 2020
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माफ करना माँ, अरमानों के अनगिनत तोहफे अपनी लाश के साथ लेकर मैं आया : श्वेता दीप्ति

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मेरे सपने लौटकर आए बक्शे में बंद होकर
अरमानों के अनगिनत तोहफे
अपनी लाश के साथ  लेकर मैं आया
कह कर गया था चिन्ता मत करना माँ
आऊँगा तो गिरवी रखी जमीन छुडाऊँगा
घर के टूटे छप्पर पर नया छावन डलवाऊँगा
बाबा की आँखों की आपरेशन कराऊँगा
तेरी सूनी कलाई में चूडी सजाऊँगा
मेरी कलाई जिसकी राखी से सजते हैं
उसके हाथ पीले करवाऊँगा
माफ करना माँ मैं वापस तो आया
पर मेरी बंद आँखों में सभी सपने
दफन हो गए उन सपनों के ही साथ
जल जाएगी अब मेरी चिता
माफ करना बाबा नहीं बन पाया
मैं आपकी आँखों की रौशनी
माफ करना बहना नहीं सजा पाया
तेरी हाथों में प्रीत की मेंहदी ।
माफ करना बस माफ कर देना ।

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