Thu. Jul 2nd, 2020

संघीयता का औचित्य प्रमाणित करने का समय : लीलानाथ गौतम

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आज पूरा विश्व कोरोना वायरस संक्रमण से सृजित परिस्थिति से गुजर रहा है । कोरोना महामारी नेपाल में भी ना फैल जाए, इसके लिए नेपाल सरकार भी सतर्क है । देश में घोषित लॉकडाउन (बन्दा–बन्दी) को उसी सतकर्ता के रूप में देखा जाता है । हां, आज देश में सम्पूर्ण यातायात सेवा (अत्यावश्यक अतिरिक्त) बन्द है । सरकारी घोषणा है कि अन्तर्राष्ट्रीय सीमा नाका को भी सील किया गया है । घोषणा के मुताबिक अन्तर्राष्ट्रीय हवाई उड़ान तो बंद है, लेकिन पैदल नेपाल प्रवेश करनेवाले लोग अधिक संख्या में दिखाई दे रहे हैं ।

विशेषतः पड़ोसी देश भारत के साथ खुली सीमा होने के कारण ऐसी परिस्थिति देखने को मिलती है । यहां तक कि काठमांडू आदि प्रमुख शहरी क्षेत्रों में पैदल चलनेवालों की संख्या भी कम नहीं है, चाहे व अत्यावश्यक सामान खरीद के बहाने निकले लोग हों या अन्य किसी बहाने से । जिसके चलते घोषित लॉकडाउन प्रभावकारी रूप में कार्यान्वयन हो रहा है, ऐसा नहीं लगता । उल्लेखित परिस्थिति कोरोना संक्रमण की दृष्टिकोण से खतरनाक है । विशेषतः लॉकडाउन घोषणा होने के बाद भारत से नेपाल प्रवेश करनेवाले नागरिक हों या नेपाल के अन्दर ही शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्र में जानेवाले, उन लोगों का सही तथ्यांक सरकार के पास नहीं है । वही लोग संभावित ‘कोरोना–बम’ हैं, इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए ।

कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति अगर गांव–गांव पहुँच जाएंगे तो परिस्थिति भयावह बन सकती है । विशेषतः भारतीय सीमा क्षेत्र से सटे हुए जिलों में ज्यादा सतकर्ता अपनानी चाहिए । क्योंकि रोजगारी के लिए भारत जानेवाले नेपालियों का सही तथ्यांक नहीं है और वे लोग कब और कहां से नेपाल प्रवेश करेंगे, यह भी नहीं कहा जा सकता है । अगर वे लोग पैदल गांव–गांव तक पहुँच जाते हैं तो इसकी जानकारी केन्द्र सरकार को नहीं भी हो सकती है । लेकिन थोड़ी–सी भी सजगता अपनाई जाती है तो स्थानीय सरकार और प्रदेश सरकार इसमें कुछ कर सकते हैं ।

हां, कोरोना वायरस का संक्रमण अधिक लोगों में फैलने से रोकने के लिए स्थानीय सरकार और प्रदेश सरकार भी प्रभावकारी भूमिका निर्वाह कर सकती है । लेकिन अभी तक स्थानीय और प्रदेश सरकार की सक्रियता अपेक्षा के अनुसार नहीं दिखाई दे रही है । महामारी को रोकने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा ही सभी नीति–नियम तथा निर्देशन जारी हो रहा है । प्रदेश तथा स्थानीय स्तर में लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश तथा स्थानीय सरकार भी अपना नीति और नियम बना सकती है, जो नहीं दिखाई दे रही है ।

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यहां एक बात स्मरणीय है कि नेपाल में संघीयता के औचित्यता को लेकर आज भी प्रश्न उठाया जा रहा है । कहा जाता है कि नेपाल में संघीयता आवश्यक नहीं है । ऐसा कहनेवाले लोग आज भी कह रहे हैं कि ३ साल से संघीयता कार्यान्वयन में हैं, लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार अपना औचित्य सिद्ध नहीं कर पा रही है, सिर्फ राज्य का खर्च बढ़ रहा है और हर काम–कारवाही के लिए केन्द्र की ओर देखा जाता है । ऐसे लोगों को जबाव देने के लिए भी विशेषतः प्रदेश सरकार की सक्रियता अपेक्षित है । सबसे पहले तो बाहर से आए लोगों को पहचान करना, उन लोगों में कोरोना परीक्षण कर आवश्यक व्यवस्थापन करना हो या आर्थिक अवस्था कमजोर होने के कारण संकटपूर्ण जीवन–यापन कर रहे जनता को राहत देना, यह सब काम प्रदेश और स्थानीय सरकार की ओर से भी प्रभावकारी ढंग से सम्पादन हो सकता है । नेपाल के कुछ शहरी क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश भू–भाग ऐसे हैं, जहां सामान्य स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं है । अगर ऐसे जगहों में कोरोना फैलता है तो परिस्थिति भयावह हो सकती है । इसीलिए केन्द्र सरकार नहीं, प्रदेश और स्थानीय सरकार की सक्रियता अधिक अपेक्षित है, प्रदेश सरकार ऐसे काम करे ताकि संघीयता का औचित्य सिद्ध हो सके ।

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सड़क में निकलते हैं तो देखते हैं कि आज हजारों लोग सैकड़ो किलोमीटर पैदल चल रहे हैं, लेकिन उन लोगों के प्रति केन्द्र सरकार थोड़ी–सी भी सम्वेदनशील नहीं दिखाई दे रहा है । कोरोना परीक्षण के लिए आवश्यक उपकरण पर्याप्त ना होने के कारण सरकार परीक्षण का दायरा भी नहीं बढ़ा पा रही है । ऐसी अवस्था में रातों–रात पैदल गांव की ओर जानेवाले लोगों में कोरोना परीक्षण की जाएगी, यह अपेक्षा भी नहीं है । लेकिन गांव जानेवालों में से अगर किसी भी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण रही तो नेपाल के गांव–गांव में कोरोना फैल जाएगी । इस तरह पैदल गांव जाने वाले व्यक्ति को गांववासी से घुलमिल होने से पहले कुछ दिनों तक अलग ही रखना पड़ेगा । यह काम सिर्फ प्रदेश सरकार और स्थानीय सरकार ही कर सकता है । अगर वे लोग पैदल गांव आ रहे हैं तो अपने गांववासी के लिए स्थानीय सरकार तथा प्रदेश सरकार की ओर से गाड़ी की व्यवस्था क्यों नहीं हो रहा है ? यह भी महत्वपूर्ण सवाल उठ रहा है । इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर देखना नहीं पड़ेगा, यह नहीं है । लेकिन अभी तक प्रदेश और स्थानीय सरकार ने ऐसा कोई भी काम नहीं किया है, पैदल गांव पहुँचने वाले लोग अपने गांव में खुला घूम रहे हैं ।

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हां, ऐसी परिस्थिति में जो जहां है, उसको वही रहना चाहिए । लेकिन सभी नागरिकों के लिए यह व्यवहारिक नहीं है । दैनिक मजदूरी कर जीवन निर्वाह करनेवाले समूह लॉकडाउन के कारण अधिक संकट में है, सरकार की ओर से सहयोग मिलने का विश्वास नहीं है, इसीलिए तो वे लोग हजारों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं । अगर सरकार के प्रति विश्वास रहता तो वे लोग भूखे–भूखे गांव नहीं जाते । अपनी मातृभूमि समझ कर विदेश से आनेवाले हो या शहर से गांव जानेवाले, सभी का तथ्यांक सरकार के पास होना जरूरी है और निश्चित समयावधि के लिए उन लोगों को गांववासी से दूर रखना ही बेहतर है । अपने वडा निवासी, जो बाहर रहते हंै, उन लोगों के लिए इतनी सी व्यवस्थापन करने की क्षमता वडा कार्यालय के पास नहीं है, यह हो ही नहीं सकता । प्रदेशसभा के लिए निर्वाचित प्रदेश सांसद् तथा स्थानीय सरकार में प्रतिनिधित्व करनेवाले जनप्रतिनिधि अब इसी काम के लिए क्रियाशील होना जरूरी है । राष्ट्रीयस्तर में कोरोना नियन्त्रण के लिए क्रियाशील रहने की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार का है । भारत से नेपाल प्रवेश करनेवाले नागरिक हो या शहर से गांव प्रवेश करनेवाले नागरिक, वे सभी संभावित ‘कोरोना–बम’ हैं, इस बम से देश को बचाना है तो प्रदेश और स्थानीय सरकार को अधिक क्रियाशील रहना जरुरी है, जो देर हो रहा है । हिमालिनी अप्रैल

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