कलयुग का एक रावण और मारा गया : योगेश मोहनजी गुप्ता
विकास दुबे के जीवन की ईहलीला के अंत होने से शायद ही किसी भी देशप्रेमी को दुख हुआ होगा। आज इस विषय पर चर्चा का मुख्य उद्देश्य उसकी मृत्यु के कारणों को खोजने का नहीं है अपितु इस सन्दर्भ में चर्चा करना है कि एक पापी का अंत हो गया। यद्यपि इस कलयुग में असंख्य रावण है, किसी एक राम के दर्शन होने मात्र से ही जनता स्वयं को भाग्यशाली मानने लगती है। विकास दुबे अपनी मृत्यु के एक दिन पूर्व उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए गया, इससे यह आभास होता है कि उसमें उस अदृश्य शक्ति के प्रति आस्था व डर की भावना विद्यमान थी, परन्तु वह यह भूल गया था कि कर्मो का फल अवश्य ही मिलता है। रावण को स्वयं श्री राम न मारा था। जब-जब इस धरती पर कोई रावण पैदा हुआ, तब-तब कोई-न-कोई राम भी अवश्य ही पैदा हुए हैं। यद्यपि विकास दुबे अपनी गलती से ही परलोक सिधारा। यदि वह पुलिस पर हमला नहीं करता तो पुलिस को भी उसपर गोली नहीं चलानी पड़ती। आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी जी को इस जघन्य अपराधी को समाप्त करने का श्रेय जाता है।
हमारे भारत के मीडिया, टीवी चैनल, फेसबुक, वाहट्सअप, इंस्टाग्राम आदि सोशल साईट्स पर नये-नये मुद्दों पर चर्चा हो रही है। टीवी चैनल अपनी टीआरपी के लिए 6-7 लोगों के साथ गर्मागर्म बहस दिखाएंगे, कुछ इसके पक्ष में और कुछ इसके विपक्ष में बोलेंगे। टीवी वालों को चर्चा हेतु एक नवीन मुद्दा मिल जाएगा। नई-नई बातें निकल कर आयेंगी। एक पुरानी कहावत है – Everything is fair, love and war. यह हम रामायण काल में भी देख चुके हैं, जब श्रीराम ने बाली को मारा। रावण से युद्ध लिए श्रीराम ने बड़ी चतुराई से उसके भाई विभीषण को शरण दी और रावण की मृत्यु का भेद जाना। इसी प्रकार महाभारत काल में कौरवों द्वारा अभिमन्यु की हत्या, अर्जुन द्वारा करण की हत्या, भीम द्वारा दुर्योधन की हत्या आदि उपरोक्त उदाहरण से यह प्रमाणित होता है कि जब युद्ध होता है तो उसमें कोई भी नियम नहीं होते, इसी प्रकार यदि कोई प्रेमी नियमों के द्वारा किसी को प्रेम करे तो वो जीवनभर हाथ मलता ही रह जाएगा। कलयुग से यदि पापियों को मिटाना है और सतयुग को पुनः लाना है तो कलियुगी रावणों को शिघ्र अतिशीघ्र समाप्त करना होगा। इस नीति का अनुपालन करना ईश्वर का आदेश भी है।
विकास दुबे की जीवन लीला समाप्त करना कोई पाप नहीं हैं, वरन् यह एक पुण्य का कार्य है, क्योंकि यदि वह जिंदा रहता तो वह इतना चतुर था कि कोई भी जेल उसे लम्बे समय तक नहीं रख पाती और शायद उसके वकील न्यायालय में ऐसे दांवपेज लगाते, जिससे हमारे न्यायधीशों को भी सबकुछ जानते हुए भी वकील की दलीलों से मजबूर होकर उसे छोड़ना पड़ सकता था। एक बार यदि वह पुनः बाहर आ जाता तो उसके अत्याचारों का कोई अंत नहीं कर पाता।
उत्तर प्रदेश की जनता का योगी जी को धन्यवाद देना चाहिए एवं जीवनपर्यन्त उनका ऋणी होना चाहिए कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के बहुत ही खतरनाक अपराधी का अंत करके कितने मासूमों और बेगुनाहो पर अत्याचार होने से देश को बचा लिया। *योगेश मोहनजी गुप्ता*

चेयरमैन
आई आई एम टी यूनिवर्सिटी
मेरठ
भारत

