मैं नारी दुष्टों की बला हूँ मैं, भूल से भी ना कहना अबला हूँ मैं : अरूणा बाजेसरिया
मै छू सकती हूँ आसमा
मै छू सकती हूँ आसमा
सिर्फ माैके की तलाश है।
क्यों समझूँ मैं स्वयं को
अबला,
जब इस दुनिया की पहचान हूँ मैं।
हर घर की जान हूँ मैं,
बेटी, बहन, पत्नी, माँ रूप में सम्मान हूँ मैं।
काैन कहता है नारी अबला हैं।
सर झुकाना नारी की कमजाेरी ना समझे।
ऊंचाई सर झुकाने से भी पायी जा सकती है।
चुप रहकर,समझदारी दिखाना
काेई नारी से सीखे।
हर मुस्किल आसान बनादे
घर परिवार काे जाेडे रखे
पत्थरीली डगर पर चल
अपनी राष्ट्र भूमि का सम्मान
बचाने हर तरह से तैयार हूँ मैं।
मैं नारी दुष्टों की बला हूँ मैं।
भूलसे भी ना कहना अबला हूँ मैं।

बैंगलाेर


