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खुद के लिए जी ले : अरुणा बाजेसरिया

 

खुद के लिए जीले

थाेडा जी ले,अपने लिए ,
कुछ मन का करले
पचपन कटी साठ्ठि की ओर
बहती नदिया की ओर

मन काे बन्धनमुक्त कर।
बहता चल, बस चलता चल
जी ले कुछ पल।
ये मन ही ताे अपने बस का है।
वानप्रस्त जीवन जी ले।
हवा जैसे गुजरती है गुजरने दाे
दिन जैसे बीतता बीतने दाे
उनमुक्त मन चंचल बावरा सा,
प्रकृति का तम न मुझ काे ढक पाता,
अाज उद्धिताका ज्वार भी न डुबाता
जैसे लगता है सब शृगांर बन गया हाे।
चलते चलते राह मे खुशिया बांटते ,बटाेरते
चलते चल,बस चलते चला जा
शान्तचित,चन्द्रमा सा सितल दृढ संकल्प लिए
परमानंद प्राप्ती कि और चला चल
मंद मंद मुस्कराते,मन काे
अब ताे।
प्रभु चरणाें में समर्पण कर
जी ले कुछ पल
अपने लिए भी जी ले।

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अरूणा बाजेसरिया
बैंगलाेर

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