श्याम गगन से बरसें, मोहन की रस बूँदें : जयप्रकाश अग्रवाल (चैनवाला)
राधाष्टमी गीत
श्याम गगन से बरसें, मोहन की रस बूँदें,
लता पता से टपकें, सावन की रस बूँदें ।
राधा का जन्म हुआ है ।
बजे दुन्दुभि, फूल बरसते,
देव, मुनि, नर सब हरसते ।
गोपी हिय में सरसें, श्री वन की रस बूँदें ।
राधा का जन्म हुआ है ।
मथुरा विहँसे, गोकुल विहँसे,
नीलोज्ज्वल जग चंद्र निकर से ।
सुन सखि सुन वंशिका वादन की रस बूँदें ।
राधा का जन्म हुआ है ।
केकी केलि नृत्य में व्यस्त,
उठे हुए हैं सबके हस्त ।
रसिया के चितवन की, आनन की रस बूँदें ।
राधा का जन्म हुआ है ।
रसपान करें, गुणगान करें,
कुंज गलिन में मान करें ।
पीलें-पीलें अब, आस्वादन की रस बूँदें ।
राधा का जन्म हुआ है ।

काठमांडू, नेपाल प

